जीवन है अनमोल
मानव जीवन, जग में,
है अतुल्य और अद्भुत।
परमात्मा का वरदान ये,
अर्पित करते आभार बहुत।।
सब जीवों में सबसे उत्तम,
भरा बुद्धि का भंडार है।
माना जाता जग में सर्वोत्तम,
शुद्ध आचार और विचार है।।
निराशा से दूर आशाओं की,
सीढ़ी पर आगे चढना।
मानव ने युगों -युगों से,
सीखा आगे बढ़ना।।
जीवन को संघर्ष बनाकर,
जो आगे बढ़ता जाता।
कुंदन सा वह तपकर,
सदैव निखरता जाता।।
बुद्धि, विवेक, हे मानव!
भरा तुझमें बढ़ चढ़कर।
कभी न ऐसा निर्णय ले,
शून्य हो जाए विवेक घटकर।।
निराशा के मेघों से,
नहीं गिरती आशा की बूँद।
आती सकारात्मक सोच से,
जीवन में रिमझिम बूँद।।
प्रकृति से लो सीख,
हर परिस्थिति में जीना।
सूरज, चाँद और तारों से,
कर्तव्य अपना निभाना।।
पर्वत, शिखर और गिरी से,
सीखो दृढ़ संकल्पी होना।
बहती नदी, नाले और धारों से,
सबको साथ ले चलना।।
गहरे समुद्र से सीखो,
मिलना और मिलाना।
अच्छा हो या हो बुरा,
सबको गले लगाना।।
जन्म है, मरण भी निश्चित,
समय से पहले न बुलाओ।
जो काम है ईश्वर का,
स्वयं से मत करवाओ।।
जीवन है अनमोल,
यूँ ही खत्म न करो।
ईश्वर कृत निधि को,
मानव कल्याण में लगाओ।
रचयिता
सन्नू नेगी,
सहायक अध्यापक,
रा0 उ0 प्रा0 वि0 सिदोली,
विकास खण्ड-कर्णप्रयाग,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।
है अतुल्य और अद्भुत।
परमात्मा का वरदान ये,
अर्पित करते आभार बहुत।।
सब जीवों में सबसे उत्तम,
भरा बुद्धि का भंडार है।
माना जाता जग में सर्वोत्तम,
शुद्ध आचार और विचार है।।
निराशा से दूर आशाओं की,
सीढ़ी पर आगे चढना।
मानव ने युगों -युगों से,
सीखा आगे बढ़ना।।
जीवन को संघर्ष बनाकर,
जो आगे बढ़ता जाता।
कुंदन सा वह तपकर,
सदैव निखरता जाता।।
बुद्धि, विवेक, हे मानव!
भरा तुझमें बढ़ चढ़कर।
कभी न ऐसा निर्णय ले,
शून्य हो जाए विवेक घटकर।।
निराशा के मेघों से,
नहीं गिरती आशा की बूँद।
आती सकारात्मक सोच से,
जीवन में रिमझिम बूँद।।
प्रकृति से लो सीख,
हर परिस्थिति में जीना।
सूरज, चाँद और तारों से,
कर्तव्य अपना निभाना।।
पर्वत, शिखर और गिरी से,
सीखो दृढ़ संकल्पी होना।
बहती नदी, नाले और धारों से,
सबको साथ ले चलना।।
गहरे समुद्र से सीखो,
मिलना और मिलाना।
अच्छा हो या हो बुरा,
सबको गले लगाना।।
जन्म है, मरण भी निश्चित,
समय से पहले न बुलाओ।
जो काम है ईश्वर का,
स्वयं से मत करवाओ।।
जीवन है अनमोल,
यूँ ही खत्म न करो।
ईश्वर कृत निधि को,
मानव कल्याण में लगाओ।
रचयिता
सन्नू नेगी,
सहायक अध्यापक,
रा0 उ0 प्रा0 वि0 सिदोली,
विकास खण्ड-कर्णप्रयाग,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

सुंदर 👌👌👌
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