मैं समय हूँ

मैं समय हूँ, देख रहा हूँ।
वर्तमान की छाती पर
इतिहास लिख रहा हूँ।
विश्व को एक हथकड़ी में
बाँध रहा हूँ।
मैं समय हूँ, जाग रहा हूँ।
विज्ञान से आगे आगे
मैं भाग रहा हूँ।
साधना को साध रहा हूँ।
मैं समय हूँ, सिसक रहा हूँ।
बिलख रहा हूँ लाशों पर
मजबूरों की मजबूरी पर।
कराहती आवाजों पर।
छटपटाती साँसों पर।
मैं समय हूँ, बह रहा हूँ
निरन्तर अथक।
ध्वस्त कीं मैंने सीमाएँ सारी।
पड़ा रूढ़िवादियों पर भारी।
तकनीकी, उपकरण, विज्ञान
देखी सबकी लाचारी।
क्षण क्षण पल पल
मानवता भी हारी।
मैं समय हूँ प्रलयंकारी।
  मेरे आगे बेबस
दुनिया सारी
प्रकृति का प्रतिकार ले रहा हूँ।
मैं समय हूँ अट्हास कर रहा हूँ
वर्तमान की छाती पर
इतिहास लिख रहा हूँ।
मैं समय हूँ।।।

रचयिता
अनीता ध्यानी (अनि),
प्राथमिक विद्यालय देवराना,
विकास खण्ड-यमकेश्वर,
जनपद-पौड़ी गढ़वाल,
उत्तराखण्ड।


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