शिक्षक होता राष्ट्र निर्माता
शिक्षक होता राष्ट्र निर्माता,
देश का होता भाग्य विधाता।
समाज को उचित दिशा दिखाता,
हर पल है सम्मान वो पाता।
नया ज्ञान हर पल वो देता,
बच्चों को अच्छी शिक्षा देता।
शिक्षा के आयाम को बतलाता है हमको,
जीवन के आधार से जोड़ता है उसको।
उज्ज्वल भविष्य है यह बुनता,
बच्चों की समस्या को है सुलझाता।
शिक्षा की लौ को जग में फैलाया,
गली, मोहल्ला, हर गाँव तक है पहुँचाया।
खुद के सपने छोड़ बच्चों के सपनों को जीता है,
यही बाइबिल, कुरान यही हमारी भगवत गीता है।
हमें अपने लक्ष्य का मार्ग है दिखाता,
सदमार्ग के रास्ते पर चलना है सिखाता।
शिक्षक का तुम सदा करो सम्मान,
नही मिलेगा उसके जैसा कोई तुम्हें महान।
रचयिता
आकांक्षा मिश्रा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय सिकंदरपुर,
विकास खण्ड-सुरसा,
जनपद-हरदोई।
देश का होता भाग्य विधाता।
समाज को उचित दिशा दिखाता,
हर पल है सम्मान वो पाता।
नया ज्ञान हर पल वो देता,
बच्चों को अच्छी शिक्षा देता।
शिक्षा के आयाम को बतलाता है हमको,
जीवन के आधार से जोड़ता है उसको।
उज्ज्वल भविष्य है यह बुनता,
बच्चों की समस्या को है सुलझाता।
शिक्षा की लौ को जग में फैलाया,
गली, मोहल्ला, हर गाँव तक है पहुँचाया।
खुद के सपने छोड़ बच्चों के सपनों को जीता है,
यही बाइबिल, कुरान यही हमारी भगवत गीता है।
हमें अपने लक्ष्य का मार्ग है दिखाता,
सदमार्ग के रास्ते पर चलना है सिखाता।
शिक्षक का तुम सदा करो सम्मान,
नही मिलेगा उसके जैसा कोई तुम्हें महान।
रचयिता
आकांक्षा मिश्रा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय सिकंदरपुर,
विकास खण्ड-सुरसा,
जनपद-हरदोई।

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