कोयल
काली- काली कोयल न्यारी,
फिरती इत-उत डाली-डाली,
कुहू-कुहू की बोली प्यारी,
कूके कोयल हो मतवाली।
प्रातः काल सूरज की लाली,
वन-उपवन की छटा निराली,
अमराई लदी हुई डाली,
चले बयार मध्यम गति वाली।
देख-देख अद्भुत हरियाली,
झूमे कोयल हो हर्षाली,
मन की उजली तन की काली,
सबको प्यारी लगने वाली।।
रचयिता
सुप्रिया सिंह,
इं0 प्र0 अ0,
प्राथमिक विद्यालय-बनियामऊ 1,
विकास क्षेत्र-मछरेहटा,
जनपद-सीतापुर।
फिरती इत-उत डाली-डाली,
कुहू-कुहू की बोली प्यारी,
कूके कोयल हो मतवाली।
प्रातः काल सूरज की लाली,
वन-उपवन की छटा निराली,
अमराई लदी हुई डाली,
चले बयार मध्यम गति वाली।
देख-देख अद्भुत हरियाली,
झूमे कोयल हो हर्षाली,
मन की उजली तन की काली,
सबको प्यारी लगने वाली।।
रचयिता
सुप्रिया सिंह,
इं0 प्र0 अ0,
प्राथमिक विद्यालय-बनियामऊ 1,
विकास क्षेत्र-मछरेहटा,
जनपद-सीतापुर।

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