हम शिक्षक हैं

 हम शिक्षक हैं भई शिक्षक,
 हमसे ही दुनिया सारी,
 हर बच्चे का सपना पूरा,
 करने की है तैयारी।

 पहली शिक्षक माता है,
 जननी है धरती जैसी,
 उसकी आँखों से देखी
 सुंदर दुनिया है ऐसी।

शिक्षक है जैसे बाती
खुद जलता लौ के जैसा,
अंधकार को मिटाये,
फैलाये प्रकाश ऐसा।

शिक्षक है इंजन जैसे,
डिब्बे हैं उसके चेले,
आगे-आगे इंजन है
पीछे को डिब्बे हों ले।

चेले हैं जैसे पथिक
शिक्षक है खेवनहार,
ज्ञान का चप्पू चलाये
करे भव सागर से पार।

शिक्षक है जैसे जौहरी
चेले हैं उसके हीरे,
तराशता जी जान से,
अनमोल बनाये ऐसे।

कुछ पाने की जब हो ललक
मंजिल हो सपनों में,
अर्पित कर दो जीवन को
शिक्षक के चरणों में।।

रचयिता
खुशबू गुप्ता,
सहायक अध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय भदोई,
विकास खण्ड-सरोजनी नगर,
जनपद-लखनऊ।

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