प्यारी गौरैया
रोज सवेरे मेरे घर पर,
प्यारी गौरैया आती है।
चूँ-चूँ, ची ची की धुन गाकर,
सब का मन बहलाती है।
नन्हीं सी मेहनती गौरैया,
तिनका-तिनका लाती है।
भूरे रंग की भोली चिरैया,
अपना नीड़ बनाती है।
पेड़ों की टहनी पर चढ़ के,
सुंदर नाच दिखाती है।
पानी अपनी चोंच में भर के,
वो फुर्र से उड़ जाती है।
चावल के बिखरे दानों को,
भर-भर चोंच वो खाती है।
बच्चे उनको जब छूने भागें,
वो फौरन उड़ जाती है।
पंखों को अपने फैलाकर,
ऊँची उड़ान भर जाती है।
नन्हीं सी अपनी आँखों में,
कितने ख्वाब सजाती है।
रोज सवेरे मेरे घर पर,
प्यारी गौरैया आती है।
चूँ-चूँ, ची ची की धुन गाकर,
सब का मन बहलाती है।
रचयिता
सीमा नौटियाल,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय गाड़ी,
विकास खण्ड-दशोली,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।
प्यारी गौरैया आती है।
चूँ-चूँ, ची ची की धुन गाकर,
सब का मन बहलाती है।
नन्हीं सी मेहनती गौरैया,
तिनका-तिनका लाती है।
भूरे रंग की भोली चिरैया,
अपना नीड़ बनाती है।
पेड़ों की टहनी पर चढ़ के,
सुंदर नाच दिखाती है।
पानी अपनी चोंच में भर के,
वो फुर्र से उड़ जाती है।
चावल के बिखरे दानों को,
भर-भर चोंच वो खाती है।
बच्चे उनको जब छूने भागें,
वो फौरन उड़ जाती है।
पंखों को अपने फैलाकर,
ऊँची उड़ान भर जाती है।
नन्हीं सी अपनी आँखों में,
कितने ख्वाब सजाती है।
रोज सवेरे मेरे घर पर,
प्यारी गौरैया आती है।
चूँ-चूँ, ची ची की धुन गाकर,
सब का मन बहलाती है।
रचयिता
सीमा नौटियाल,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय गाड़ी,
विकास खण्ड-दशोली,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

सुन्दर कविता
ReplyDeleteThankyou so much mam
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