गुरु महिमा

गुरू है ब्रह्मा,  गुरू है विष्णु,  गुरू ही महेश समान है,
गुरू से बड़ा न कोई जहां में गुरू की महिमा महान है।

मात-पिता ने जन्म दिया  पर गुरूओं ने संस्कार दिए,
सत्य, अहिंसा, नैतिकता  के हमको  ये उपहार दिए।
गुरूओं  का  हर  इक  उपहार  ईश्वर  का  वरदान है।
           गुरू से बड़ा न कोई जहां में ................

भले बुरे का भेद बता राह सही हमको जो दिखाता है,
जीवन - पथ पर आगे बढ़ना हमको जो सिखलाता है।
गुरूओं  की हर  इक  वाणी तो अमृत  के  समान  है।
           गुरू से बड़ा न कोई जहां में ...............

चाहे  रामायण  में पढ़ लो, या वाहे  गुरू के बखान में,
चाहे गीता  में तुम  खोजो, या  खोजो  तुम  कुरान में।
गुरूओं का सम्मान करना ही हर मज़हब का ज्ञान है।
            गुरू से बड़ा न कोई जहां में .....

रचयिता
राजवीर सिंह 'तरंग',
प्रधानाध्यापक, 
प्राथमिक विद्यालय सिलहरी,
विकास क्षेत्र-सिलहरी, 
जनपद-बदायूँ।

Comments

Total Pageviews