महीनों की महिमा
आसमान से ओस गिरी है,
आई देखो जनवरी है।
28 दिन की फरवरी है,
देखो कितनी हरी-भरी है।
बागों में देखो बौर हैं आये,
मार्च में देखो होली आये।
आया देखो यह अप्रैल,
तपने लगे ये खपरैल।
मई में देखो गिरे पसीना,
हमको चैन मिले कहीं ना।
मानसून लेकर आता जून,
तब मिलता हमको सुकून।
बारिश करती है जुलाई,
हम सबके मन को भाई।
अगस्त में देखो बात निराली,
चारों तरफ छाई खुशहाली।
सितम्बर देखो लाता सौगात,
होती सर्दी की शुरुआत।
अक्टूबर में दीवाली है आती,
सबके लिए खुशियाँ ले आती।
नवम्बर में हम थर थर काँपें,
आग जलाकर खुद को तापें।
आखिरी महीना दिसम्बर है आया,
संग अपने क्रिसमस है लाया।
रचयिता
आकांक्षा मिश्रा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय सिकंदरपुर,
विकास खण्ड-सुरसा,
जनपद-हरदोई।
आई देखो जनवरी है।
28 दिन की फरवरी है,
देखो कितनी हरी-भरी है।
बागों में देखो बौर हैं आये,
मार्च में देखो होली आये।
आया देखो यह अप्रैल,
तपने लगे ये खपरैल।
मई में देखो गिरे पसीना,
हमको चैन मिले कहीं ना।
मानसून लेकर आता जून,
तब मिलता हमको सुकून।
बारिश करती है जुलाई,
हम सबके मन को भाई।
अगस्त में देखो बात निराली,
चारों तरफ छाई खुशहाली।
सितम्बर देखो लाता सौगात,
होती सर्दी की शुरुआत।
अक्टूबर में दीवाली है आती,
सबके लिए खुशियाँ ले आती।
नवम्बर में हम थर थर काँपें,
आग जलाकर खुद को तापें।
आखिरी महीना दिसम्बर है आया,
संग अपने क्रिसमस है लाया।
रचयिता
आकांक्षा मिश्रा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय सिकंदरपुर,
विकास खण्ड-सुरसा,
जनपद-हरदोई।

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