प्रिय गुरूवर
वन्दन- अभिनन्दन करती हूँ
बारम्बार नमन करती हूँ।
आज दिवस है, पाँच सितम्बर
प्रिय गुरुवर, स्नेहिल गुरूवर
ज्ञान के सागर, पथ के प्रदर्शक
ममता की मूरत हैं गुरूवर।
ध्वनि -अक्षर का ज्ञान सिखाकर
लक्ष्य को प्राप्त कराते गुरूवर
कर्तव्यनिष्ठ का भाव जगाकर
हमें कर्मप्रधान बनाते गुरूवर
सूर्य प्रभा की रश्मि सदृश तुम
चहुँदिश ज्ञान के पुँज हो गुरूवर
सम्मान -भाव और नैतिकता का
पाठ पढ़ाते आप ही गुरूवर
कुपथ मार्ग से सुपथ मार्ग की
दिशा दृष्टि दिखलाते गुरूवर
वन्दन अभिनंदन करती हूँ
बारंबार नमन करती हूँ।
रचयिता
दीपा पाण्डेय,
प्रवक्ता संस्कृत,
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज काकड़,
विकास खण्ड-बाराकोट,
जनपद-चम्पावत,
उत्तराखण्ड।
बारम्बार नमन करती हूँ।
आज दिवस है, पाँच सितम्बर
प्रिय गुरुवर, स्नेहिल गुरूवर
ज्ञान के सागर, पथ के प्रदर्शक
ममता की मूरत हैं गुरूवर।
ध्वनि -अक्षर का ज्ञान सिखाकर
लक्ष्य को प्राप्त कराते गुरूवर
कर्तव्यनिष्ठ का भाव जगाकर
हमें कर्मप्रधान बनाते गुरूवर
सूर्य प्रभा की रश्मि सदृश तुम
चहुँदिश ज्ञान के पुँज हो गुरूवर
सम्मान -भाव और नैतिकता का
पाठ पढ़ाते आप ही गुरूवर
कुपथ मार्ग से सुपथ मार्ग की
दिशा दृष्टि दिखलाते गुरूवर
वन्दन अभिनंदन करती हूँ
बारंबार नमन करती हूँ।
रचयिता
दीपा पाण्डेय,
प्रवक्ता संस्कृत,
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज काकड़,
विकास खण्ड-बाराकोट,
जनपद-चम्पावत,
उत्तराखण्ड।

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