शिक्षक
शिक्षक है-
माता-पिता के समान,
सत्य/असत्य की
कराता है पहचान।
शिक्षक है-
शिल्पकार के समान,
समाज को तराशकर
देता है नवज्ञान।
शिक्षक है-
जौहरी के समान,
छात्रों के कौशल की
करता है पहचान।
शिक्षक है-
जलते दीये के समान,
स्वयं जलकर के
करता है रौशन जहां।
शिक्षक है-
फलदार वृक्ष के समान,
बिना भेदभाव के भरता झोली
करता है ज्ञानवान।
शिक्षक है-
उस अथाह सागर के समान,
मिलता उसे सुकून जब हो
छात्रों की ज्ञान पिपासा का समाधान।
रचयिता
मंजू गुसांईं,
सहायक अध्यापक,
राजकीय आवासीय प्राथमिक विद्यालय थराली,
विकास खण्ड-थराली,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।
माता-पिता के समान,
सत्य/असत्य की
कराता है पहचान।
शिक्षक है-
शिल्पकार के समान,
समाज को तराशकर
देता है नवज्ञान।
शिक्षक है-
जौहरी के समान,
छात्रों के कौशल की
करता है पहचान।
शिक्षक है-
जलते दीये के समान,
स्वयं जलकर के
करता है रौशन जहां।
शिक्षक है-
फलदार वृक्ष के समान,
बिना भेदभाव के भरता झोली
करता है ज्ञानवान।
शिक्षक है-
उस अथाह सागर के समान,
मिलता उसे सुकून जब हो
छात्रों की ज्ञान पिपासा का समाधान।
रचयिता
मंजू गुसांईं,
सहायक अध्यापक,
राजकीय आवासीय प्राथमिक विद्यालय थराली,
विकास खण्ड-थराली,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

अति सुंदर👌👌👌👌
ReplyDeleteसुन्दर रचना
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