साक्षरता दिवस
निरक्षरता अभिशाप को
साक्षरता से हराना है।
एक-एक निरक्षर को
साक्षर जरूर बनाना है।
अज्ञान के अंधकार को
ज्ञान दिया दिखाना है।
मन मष्तिस्क में सबके
ज्ञान अलख जगाना है।
दीन-हीन असहाय के
हाथ कलम पकडा़ना है।
लिखे भाग्य पढ़ लिख
जन जागरूक बनाना है।
अक्षर ज्ञान की गंगा में
मन पावन कर जाना है।
एक दिन ही नहीं, हर दिन
साक्षरता दिवस मनाना है।
भले बुरे की करें पहचान
ऐसा नागरिक बनाना है।
विश्व गुरु बने देश भारत
स्वयं बलिहारी हो जाना है।
रचयिता
प्रेमलता सजवाण,
सहायक अध्यापक,
रा.पू.मा.वि.झुटाया,
विकास खण्ड-कालसी,
जनपद-देहरादून,
उत्तराखण्ड।
साक्षरता से हराना है।
एक-एक निरक्षर को
साक्षर जरूर बनाना है।
अज्ञान के अंधकार को
ज्ञान दिया दिखाना है।
मन मष्तिस्क में सबके
ज्ञान अलख जगाना है।
दीन-हीन असहाय के
हाथ कलम पकडा़ना है।
लिखे भाग्य पढ़ लिख
जन जागरूक बनाना है।
अक्षर ज्ञान की गंगा में
मन पावन कर जाना है।
एक दिन ही नहीं, हर दिन
साक्षरता दिवस मनाना है।
भले बुरे की करें पहचान
ऐसा नागरिक बनाना है।
विश्व गुरु बने देश भारत
स्वयं बलिहारी हो जाना है।
रचयिता
प्रेमलता सजवाण,
सहायक अध्यापक,
रा.पू.मा.वि.झुटाया,
विकास खण्ड-कालसी,
जनपद-देहरादून,
उत्तराखण्ड।

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