शिक्षक

शिक्षक हैं महान
सबको देते ज्ञान।
ज्ञान की बातों से होता
जगत का उद्धार।

तुम ही पथ- प्रदर्शक
मंजिल तक पहुँचाने वाले।
निराकार को आकार देते
सत्य -झूठ का भेद बताते।

गुरु के हाथों से होता
भविष्य का निर्माण।
गुरु के चरणों में है,
कोटि- कोटि प्रणाम।

 गुरु ही सृष्टि
 गुरु ही शिल्पी।
कभी प्यार से कभी डाँट से
अनुशासन का पाठ पढ़ाते।

नेता, डॉक्टर, इंजीनियर
पुलिस, फौजी और वैज्ञानिक।
जीवन के हर रूप में,
शिक्षक ही समाए होते।

गुरु द्रोण, बाल्मीकि हों
राधाकृष्णन, टैगोर महान।
गांधी, अंबेडकर, मौलाना हों
अद्वितीय शिक्षक हैं सब महान।

अज्ञानता का अंधकार मिटाते
भटके हुए को रास्ता बताते।
गुरु हथौड़ी और छैनी हैं
जो पत्थर को तराशकर मूर्ति बनाते।

हृदय से करती हूँ,
सभी गुरुओं को नमन।
कोटि- कोटि वंदन
है, कोटि-कोटि अभिनंदन

रचयिता 
रजनी देवी,
सहायक अध्यापिका, 
राजकीय प्राथमिक विद्यालय कौब,
विकास खण्ड- नारायणबगड़,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

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