बच्चों की चिट्ठी
आज बच्चों की चिट्ठी आई
मन की बात मुझे बतलाई।
प्रिय मैडम से शुरू थी चिट्ठी
बातें उनकी खट्टी- मीठी
स्कूल की याद बहुत सताए
याद करके आँखों में आँसू आए।
घंटी की टन- टन सुनने को तरसे
रोज सुबह आँखों से आँसू बरसे।
कहानी- कविता याद करके सुनाऊँगी
मैडम जी मैं रोज स्कूल आऊँगी।
आपका कहना मानूँगी
मन कहता मेरा मैं रोज स्कूल आऊँगी।
चिट्ठी में और भी बातें
कहते घर में हो गए बोर।
हर कोई हम पर चिल्लाता
सबका जोर हम पर ही चलता।
इधर नहीं उधर बैठो
ऊपर नहीं नीचे जाओ।
सोओ तो कहते जागो
जागो तो कहते सोओ।
याद स्कूल की बहुत सताती
भोजन माता भी याद बहुत आतीं।
स्वादिष्ट, पौष्टिक भोजन पकातीं
बहुत प्यार से हमें खिलातीं।
खेल हमारे कबड्डी, खो-खो
पकड़म- पकड़ाई, भागम -भगाई।
जादा पढ़ाई, थोड़ी- थोड़ी मस्ती
मैडम जी स्कूल की याद बहुत है आई।
बच्चों का भोला मन कहता
ऐ! महामारी है तू हमारी दुश्मन।
आखिर कब तू जाएगी
कब हम स्कूल आएँगे?
मैडम जी! कब हम स्कूल आएँगे?
रचयिता
रजनी देवी,
सहायक अध्यापिका,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय कौब,
विकास खण्ड- नारायणबगड़,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।
मन की बात मुझे बतलाई।
प्रिय मैडम से शुरू थी चिट्ठी
बातें उनकी खट्टी- मीठी
स्कूल की याद बहुत सताए
याद करके आँखों में आँसू आए।
घंटी की टन- टन सुनने को तरसे
रोज सुबह आँखों से आँसू बरसे।
कहानी- कविता याद करके सुनाऊँगी
मैडम जी मैं रोज स्कूल आऊँगी।
आपका कहना मानूँगी
मन कहता मेरा मैं रोज स्कूल आऊँगी।
चिट्ठी में और भी बातें
कहते घर में हो गए बोर।
हर कोई हम पर चिल्लाता
सबका जोर हम पर ही चलता।
इधर नहीं उधर बैठो
ऊपर नहीं नीचे जाओ।
सोओ तो कहते जागो
जागो तो कहते सोओ।
याद स्कूल की बहुत सताती
भोजन माता भी याद बहुत आतीं।
स्वादिष्ट, पौष्टिक भोजन पकातीं
बहुत प्यार से हमें खिलातीं।
खेल हमारे कबड्डी, खो-खो
पकड़म- पकड़ाई, भागम -भगाई।
जादा पढ़ाई, थोड़ी- थोड़ी मस्ती
मैडम जी स्कूल की याद बहुत है आई।
बच्चों का भोला मन कहता
ऐ! महामारी है तू हमारी दुश्मन।
आखिर कब तू जाएगी
कब हम स्कूल आएँगे?
मैडम जी! कब हम स्कूल आएँगे?
रचयिता
रजनी देवी,
सहायक अध्यापिका,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय कौब,
विकास खण्ड- नारायणबगड़,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

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