समय की कीमत

बीत चुका जो पल रे बन्दे
लौट पुनः नहीं आता रे
समय की कीमत जान रे बन्दे
समय को तू पहचान रे

 मात-पिता गुरु देव तुल्य हैं
सम्मान इन्हें तुम दीजो रे
कठिन डगर आसान से लगते
मेहनत गर कोई कीन्हो रे

अनमोल समय को जो पहचाने
मन्जिल वही तो पाए रे
राग-द्वेष, अभिमान तू त्यज रे
कहती ऋषियों की वाणी रे

विद्यार्थी हैं भविष्य देश के
नैतिकता सिखलाओ रे
क्षणभंगुर जीवन है बन्दे
व्यर्थ इसे न गँवाओ रे

समय की कीमत जान रे बन्दे
समय की कीमत जान रे
       
रचयिता
दीपा पाण्डेय,
प्रवक्ता संस्कृत,
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज काकड़,
विकास खण्ड-बाराकोट,
जनपद-चम्पावत,
उत्तराखण्ड।

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