माँ मुझको बस्ता दिला दे

माँ मुझको बस्ता दिला दे
मैं भी स्कूल को जाऊँगा
भैया जैसा पढ़ लिखकर
मैं इंजीनियर बन जाऊँगा।।

सुबह-सबेरे मंजन कर
मैं भी दौड़ने जाऊँगा
मैं भी बॉडी बनाऊँगा
खली बन जाऊँगा।।

माँ मुझको बैट दिला दे
मैं भी क्रिकेट खेलूँगा
खूब नाम कमाऊँगा
विराट धोनी बन जाऊँगा।

माँ मुझको बंदूक दिला दे
मैं फौजी बन जाऊँगा
सीमा  पर बैठे दुश्मन
के होश उड़ाऊँगा।।

माँ मुझको लैपटॉप दिला दे
मैं सुंदर पिचाई बन जाऊँगा

माँ मेरी प्यारी माँ मुझको
माँ मुझको पंख लगा दे।।

आसमान  में उड़ जाऊँगा
चंदा मामा के घर जाऊँगा
मुझको सब दिलवा दो
मैं सब बनके दिखलाऊँगा।।

रचयिता
माधुरी पौराणिक,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय हस्तिनापुर,
विकास खण्ड-बड़ागाँव,
जनपद-झाँसी।

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