शिक्षक और बच्चे

शिक्षक एक दर्पण है,
बच्चे उसका प्रतिबिम्ब हैं।
शिक्षक एक मोमबत्ती है,
बच्चे उसकी रोशनी हैं।।

शिक्षक एक नदी है,
बच्चे नदी की धारा हैं।
शिक्षक एक किताब है,
बच्चे उसके पृष्ठ हैं।।

शिक्षक एक मशाल है,
बच्चे उसकी लौ हैं।
शिक्षक एक वटवृक्ष है,
बच्चे उसकी शाखाएँ हैं।।

शिक्षक एक दीपक है,
तो बच्चे उसकी बाती हैं।
शिक्षक एक झरना है,
बच्चे उसकी जलधारा हैं।।

शिक्षक एक ज्योतिपुँज है,
सब बच्चे उजाला हैं।
शिक्षक एक ज्ञानी है,
पर बच्चे कोरा कागज हैं।।

शिक्षक बाग का माली है,
बच्चे बाग के फूल हैं।
शिक्षक मार्गदर्शक है,
बच्चे नादान पथिक हैं।।

जब शिक्षक ज्ञान बाँटता है, 
  बच्चों को मंजिल मिलती है।
हे ईश्वर! मेरी विनती स्वीकार करो,
मेरे सभी शिष्यों का जीवन सफल करो।।

रचयिता
हरमिन्दर कौर,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय ढकिया नं.1,
विकास खण्ड-काशीपुर,
जनपद-ऊधम सिंह नगर।

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