चरण वंदन हे गुरुवर

अन्धकार से दूर कर
प्रकाश की राह दिखाई।
असत से हटाकर,
सत की प्यास बुझाई।
     
           चरण वंदन है गुरुवर।

हाथ पकड़कर
लिखना सिखाया
जीवन पथ पर
पग धरना सिखाया।

     चरण वंदन हे गुरुवर।

मै ही सबमें हूँ
सब मुझमें हैं,
घट- घट वासी
विराट स्वरूप दिखाया।

     चरण वंदन हे गुरुवर।

मै कौन हूँ?
कोई भिन्न तो नहीं
घट में पट में सर्वत्र हूँ,
सब कुछ समझाया।

       चरण वंदन हे गुरुवर।

सर्वे भवन्तु सुखिन:
वसुधैव कुटुम्बकम्,
कर्म ही पूजा का
मर्म बतलाया।

 चरण वंदन है गुरुवर।

रचयिता 
आचार्य सन्तोष व्यास,
सहायक अध्यापक,
राजकीय जूनियर हाई स्कूल क्यारा (दोगी),
विकास खण्ड - नरेंद्र नगर,
जनपद - टिहरी गढ़वाल,
उत्तराखण्ड।

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