आदर्श शिक्षक

शिक्षक दीपक बन जलता है
अज्ञान का तिमिर मिटाने को
जीवन कौशल सिखलाता है
उन्नति की राह दिखाने को

वह परम पूज्य और ज्ञानी है
अभिमान मोह और लोभ नहीं
छात्रों की सफलता ही कुंजी जिसकी
अन्तर्मन में कोई भेदभाव नहीं

शिक्षक कुसुम बन खिलता है
अधरों पर मुस्कान लाने को
विजय पथ दिखलाता है
विफलताओं से न डरने को

उच्च स्थान है प्रभु से उसका
मन में है विश्वास यही
कर्म साधना है शिक्षा
उसको ये वरदान यही

शिक्षक सूर्य बन प्रकाशित होता है
बाधाओं को दूर भगाने को
उत्तम नेतृत्वकर्ता बन जाता है
जीत का पैगाम शिष्यों को दिलाने को

वह सागर का मोती है
अमूल्य उपहार हमारे जीवन का
पा ही लेना है मंजिल को
आशीर्वाद यदि हो शिक्षक का

रचयिता
हिमांशी यादव,
सहायक शिक्षिका,
प्राथमिक विद्यालय गोपालपुर,
विकास खण्ड-सफीपुर,
जनपद-उन्नाव।

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