विश्व जैव विविधता दिवस

प्रकृति और मानव का बहुत प्राचीन संबंध,

एक-दूसरे पर निर्भरता का अनुबंध,

विविध प्राकृतिक प्रणालियों पर निर्भर जनजीवन,

करो प्रकृति की हरियाली का प्रतिपल प्रबंध।


प्रकृति ने बहुत दिया हमें, हम क्या दे जाते हैं,

22 मई को ये दिवस मनाकर कृतज्ञता जताते हैं,

प्रकृति के संरक्षण के प्रति जागरूकता जरूरी है,

वृक्ष धरा का गहना है, क्यों यह भूल जाते हैं।


जैव विविधता का तात्पर्य है जैव और विविधता,

सभी प्रकार के जीवन को संदर्भित करता,

पर्यावरण के साथ जीवन का परस्पर संबंध,

सामान और सेवाएँ प्रदान करती है जैव विविधता।


भोजन, पानी, दवा, कपड़े पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर,

आशा, एकजुटता, साथ कार्य करके बनो इसके सर्वर,

प्रकृति के साथ सद्भाव में सुरक्षित भविष्य बनाओ,

महामारी से उबरने को बनो तुम आत्मनिर्भर।


29 दिसंबर 1993 को लागू हुआ यह दिवस,

2001 से यह प्रतिवर्ष मनाया जाने लगा दिवस,

भविष्य के लिए इसकी भूमिका पर करो चिंतन,

संयुक्त राष्ट्र संघ ने प्रारंभ किया था यह दिवस।


रचयिता
नम्रता श्रीवास्तव,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय बड़ेह स्योढ़ा,
विकास खण्ड-महुआ,
जनपद-बाँदा।

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