कब खुलेगा स्कूल

 गए थे वृक्षारोपण करने
 हम विद्यालय में अपने
 बच्चों की आँखों में देखी
 एक नई चमक तब हमने
 काफी समय बाद वह हमको दिखे थे
  देख रहे थे वह दूर से ही सहमे हुए थे
   प्रश्न आँखों में लिए वे खड़े हुए थे
 कब खुलेगा स्कूल?
मौन ही पूछ रहे थे
चरण छूने की आतुरता
उन में दिख रही थी
मैडम को देख लेने से
मिली खुशी झलक रही थी
  वह बालमन आतुर था
 फिर से विद्यालय आने को
 अपने कोलाहल से
उसमें जान भरने को
 प्रसन्न दिखे वह हमें देखकर
 जैसे खुश होते हैं वह गिफ्ट पाकर
 दौड़-दौड़ कर आते
 वे फिर रुक जाते
 सोच रहे थे काश हम रोज मिल पाते
   बच्चों की जिज्ञासा को समझा था मैंने
कोरोना का हाल बताया था मैंने
कहा अभी कुछ समय
   और सब्र करो
 घर में ही रहकर तुम पढ़ाई करो
 जल्द ही वह वक्त भी आ जाएगा
 जब हम फिर से विद्यालय आएँगे
  सारी फरमाइश तुम्हारी
 हम पूरी कर पाएँगे
  पढ़ना, लिखना, खेलना, कूदना सब होगा
विद्यालय में बच्चों फिर से जीवन होगा
 पड़ा हुआ है वह तुम्हारे बिना निर्जीव सा
 भर देना तुम रंग उसमें जीवन का
 खत्म होगा यह प्रकोप इस महामारी का
 जल्दी पूरा होगा सपना बच्चों हम सबका।

रचयिता 
दीपा कर्नाटक,
प्रभारी प्रधानाध्यापिका,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय छतौला,
विकास खण्ड-रामगढ़,
जनपद-नैनीताल,
उत्तराखण्ड।

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