प्रकृति महान धरोहर

जीवन की डोर हवा और पानी,
बिन पानी खत्म जीवन कहानी।
खानी है हवा, तो पेड़ बचाओ
पीना है पानी, तो वृक्ष लगाओ।

               पानी  के  हैं  स्रोत अनेक
               नदी, नाले पोखर कुआँ भी है एक।
               फिर भी पानी  नहीं है  सबको
               पीपल में भी छाँव नही है हमको।

पलायन से गाँव वीरान हो गये
धरती से पेड़ गायब हो गये।
खत्म  पुराने  धारे  हो  गये
कुएँ भी अब नदारद हो गये।

            वैज्ञानिकता के आधुनिक युग में
            जैविक हथियार, मिसाइलों के प्रयोग में
            बिन हवा- पानी  के जी  पाओगे
            या कोल्ड ड्रिंक से ही काम चलाओगे।

हिमालय डरा सहमा हुआ है
मानव  के  इस  उत्कर्ष  से।
नित  आँसू    बहा  रहा  है
ग्लोबल वॉर्मिग  के डर से।

         आओ  मिल  बैठ   करें जतन
         सब   मिल  बैठ  करें  मनन।
         गाँव बसाएँ और पेड़ लगाएँ
         प्रकृति की अमूल्य देन बचाएँ।

जल  जमीन और  जन्तु
प्रकृति के हैं अभिन्न अंग।
मानव, कर  इनका संरक्षण
तालमेल से जी  इनके संग।

           प्रकृति  बिना मानव अधूरा
           यह मानव की महान धरोहर।
          आओ हर हाल इनकी रक्षा करें
          वरना धरती पर हो जाएँगे बेघर।

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर
मन  से  लें  प्रतिज्ञा  सभी।
जल, जंगल, खनिज या जन्तु
अनायास नहीं दोहन करेंगे कभी।

रचयिता
सन्नू नेगी,
सहायक अध्यापक,
रा0 उ0 प्रा0 वि0 सिदोली,
विकास खण्ड-कर्णप्रयाग, 
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

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