शक्ति दर्शन 4, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ नीलम भदौरिया, फतेहपुर

       *शक्ति दर्शन 4*
*बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ*
      *उड़ान हौसले की*
            (संस्मरण)

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वार्षिकोत्सव का दिन।वंदनवार से तोरणद्वार व प्रांगण सज्ज था।तभी मुख्य अतिथि महोदया का आगमन हुआ।ड्रम तथा कदम ताल के साथ उन्हें मंच पर स्थान दिया गया।
उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रदेश विजेता वत्सला और उसकी मां को सम्मानित किया गया।
"वत्सला के हाथ में ट्राफी" तालियों की गूंज, उसकी मां का अपलक निहारना।उनकी आंखों में खुशी के आंसुओं का समंदर उमड़ना। उनके मुख से शब्द न फूटना। फिर धीरे से मेरे पास आकर फुसफुसाई ..."आपहिं के कारन आज ई दिन देखें, हम तुम्हार जस कबहुं न भुलिबे,हमरा मान- पान ई बिटिया के कारन भवा,ऊ दिना तुम्हरी बात न मानित तौ आज या घड़ी न देख सकित"।
कार्यक्रम समाप्त हो गया पर मैं वहीं अटक गई थी.. मानों आज की ही घटना थी........
अधखुले किवाड़ ..घर से झगड़ने की आवाजें आ रही थीं। फिर.... छोटे बच्चे के रोने की आवाज....
मुझे दरवाजे पर देख वत्सला की मां तपाक से बोली!
"बेटवा स्कूल नहीं पंहुचा का बहिन जी?"
"नहीं! मैं वत्सला के लिए आई हूं" मैंने कहा।
"बार बार न बुलावा करौ
छोटका भाइन का को देखी?
बिटिया है ..अन्त म चूल्ह हि फुकिहै।"
"क्यों ? मैं भी तो बेटी हूं। पर मेरे माता पिता ने मुझे अवसर दिया।बड़ी गुणवान है वत्सला! मौका तो मिले" मुझे चिंता थी कि कहीं इस मासूम का रुपहला भविष्य परिस्थितियों की भेंट न चढ़ जाए। पर मेरी कोशिश रंग लाई। वत्सला की वापसी हुई। *उसके पंखों ने उड़ान भरी*। आज वत्सला बेटियों के लिए प्रेरणाश्रोत है। क्योंकि
*बेटी है हमारा अभिमान, बेटी है दो कुलों की शान।*बेटी को दिलाना है पहचान, तो क्यों रहे सब इससे अनजान।।*
*लेखिका :*
*नीलम भदौरिया*,
राज्य पुरस्कार प्राप्त
(प्रधानाध्यापिका)
प्राथमिक विद्यालय पहरवापुर,
शि.क्षे.मलवॉ, जनपद फतेहपुर।
*संकलन:-*
*सरिता रॉय*
*टीम मिशन शिक्षण संवाद शक्ति परिवार*

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