दीवाली

लावणी छंद


जगमग घृत के दीप जले हैं, है खुशियों की दीवाली,

कार्तिक कृष्ण अमावस्या की, आलोकित रजनी काली।

बाट निहारे अवध प्रजा सब, मिलन आतुर भरत भाई,

चौदह वर्ष बाद हैं लौटे, लखन सिय संग रघुराई।। 


यही खुशी प्रतिवर्ष मनाते, श्री, गणपति पूजा होती,

आदर्श जीवन श्रीराम का, तम, कलुष हृदय का धोती।

है शुभ बन्दनवार सुशोभित, द्वार सजी है रंगोली,

माँ लक्ष्मी आती धरती पर, सुख श्री से भरने झोली।।


रोशनी में वसुधा नहायी, दीप, झालर की कतारें,

निशा दिवस सी लगती जैसे, हो भू पर उतरे तारे।

अंधकार का नाम नहीं अब, प्रेम की फुलझड़ी छूटी,

खीलें, बताशें खिलखिलातीं, खुशियों की सरिता फूटी।।


पावन दीपक दीवाली के, प्रकाश जीवन में लाए,

सुख समृद्धि की वर्षा होवे, यश वैभव बढ़ती जाए। 

श्री गणेश माता लक्ष्मी से, विनती हम करते हैं ये,

बुद्धि विवेक दीजिए हमको, अन्न-धन से भरें घर ये।।


रचयिता

सुमन सिंह,

सहायक अध्यापक,

उच्च प्राथमिक विद्यालय बिल्ली,

विकास खण्ड-चोपन, 

जनपद-सोनभद्र।



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