चिड़िया
चूँ चूँ करती आई चिड़िया
साथ में दाना लाई चिड़िया।
इकट्ठा करती दाना-दाना
सब मिल बाँटकर खाना।
और जोड़ती तिनका-तिनका
बनाती उन तिनकों से घर अपना।
पंख फैलाकर आसमान में उड़ती
थकने पर ही फिर वह रुकती।
नभ में विचरण दिनभर करती
शाम ढले अपने घर आती।
फिर वह अपने बच्चों के संग रहती
यही नियम दुनिया को बतलाती।
रचयिता
सुषमा मलिक,
सहायक अध्यापक,
कंपोजिट स्कूल सिखेड़ा,
विकास खण्ड-सिंभावली,
जनपद-हापुड़।

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