विश्व मानवाधिकार दिवस

समानता के अधिकार की हर जगह कमी है,

इसलिए तो कुछ आँखों में आज भी नमी है।


प्रत्येक मानव के विश्व में होते हैं अधिकार,

जो बाँधते हैं उनको एक सूत्र एक आकार।


भेदभाव ना हो किसी के साथ खुशी से जियो जीवन,

असमानता मिटाने को हुआ अधिकारों का निर्माण।


देश की प्रगति का भी रखा जाए ध्यान,

देश के साथ मानव अधिकारों का ना हो हनन।


10 दिसंबर 1948 को जारी हुआ घोषणा पत्र,

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने बताया इसे सर्वत्र।


1950 में तय हुआ यह दिवस मनाया जाए,

मानव अधिकारों का एक कानून लाया जाए।


12 अक्टूबर 1993 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन,

इसके बाद से इस दिन  का आया चलन।


लिंग, भाषा, धर्म पर कभी ना पनपे भेदभाव,

सिद्धांत बनाएँ अपना सर्वधर्म समभाव।


जानकारी से कभी कोई ना हो वंचित,

प्रेम, स्नेह, अपनेपन से रिश्ते हों संचित।


रचयिता
नम्रता श्रीवास्तव,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय बड़ेह स्योढ़ा,
विकास खण्ड-महुआ,
जनपद-बाँदा।


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