विश्व मानवाधिकार दिवस
बहुत बनाए मानव ने,
अपने लिए अधिकार।
क्या कभी सोचा है,
अपने कर्तव्य को एक भी बार।।
यह भी मेरा वो भी मेरा,
सब कुछ मेरा हो जाए।
इसके लिए चाहें किसी का,
अधिकार छिन जाए।।
मानवाधिकार का अर्थ,
मात्र यह नहीं कि अधिकार हमारा।
दूसरे के अधिकार का भी सम्मान करें,
तभी खुशहाल बनेगा यह जगत सारा।।
सबको मिलें बुनियादी सुविधाएँ,
दूर हो सबकी दुविधाएँ।
विश्व शांति की प्रार्थना करते हम,
समृद्ध हो सभी दिशाएँ।।
रचयिता
सुधांशु श्रीवास्तव,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मणिपुर,
विकास खण्ड-ऐरायां,
जनपद-फ़तेहपुर।

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