मैथिलीशरण गुप्त

हिंदी के थे प्रथम कवि खड़ी बोली के आधार,

मैथिलीशरण गुप्त स्वतंत्रता संग्राम के कर्णधार,

साहित्य जगत में दद्दा का संबोधन था पाया,

राष्ट्रकवि की पदवी पाए यह नाटककार।


3 अगस्त झाँसी है इनका अवतरण दिवस,

मनाते हैं इसको तभी से कवि दिवस,

पवित्रता, नैतिकता, मानवीय संबंधों की रक्षा का मान,

"जयद्रथ वध" "द्वापर", "रंग में भंग" लिखा और "दिवोदास"।


साकेत में दिखाया निर्गुण परब्रह्म रूप,

राम के प्रति भक्ति -भावना का प्रतिरूप,

उर्मिला की व्यथा को भी दिया एक आयाम,

रामचरित के दर्शन में आधुनिकता की छाप।


पंचवटी प्रकृति का मनोहारी रुप समेटे,

वन्य जीवन के प्रति गहरा अनुराग कहते,

दार्शनिकता और आध्यात्मिकता का  संगम,

गुप्त जी की रचनाओं में नए रूप में दिखते।


"मंगला प्रसाद पुरस्कार", "साहित्य वाचस्पति" सम्मान,

"पद्मभूषण" से पाया देश में सम्मान,

12 दिसंबर जग से किनारा कर गए,

खड़ी बोली को काव्य में निर्मित करने में लगा दी जान।


रचयिता
नम्रता श्रीवास्तव,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय बड़ेह स्योढ़ा,
विकास खण्ड-महुआ,
जनपद-बाँदा।

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