धैर्य
सुख-दुःख आनी-जानी है,
धीरज ना तुम खोना।
जीवन की यही कहानी है,
विचलित कभी ना होना।
कभी सुखों की धूप गुनगुनी,
कभी दुखों की चुभन है।
कभी अनगिनत विपत्ति है आती,
कभी खुशियों भरी लगन है।
तितली बनकर मन कभी उड़ता,
खुशियों के उपवन में।
घोर निराशा कभी घेरती,
असहाय बन जीवन में।
ध्यान करो, नित योग करो,
सकारात्मक विचार रखो।
ऊर्जा आयेगी तन-मन में,
इतना तुम विश्वास रखो।
काँटों घिरे फूलों को देखो,
हरपल वो मुस्काते हैं।
तूफां में पेड़ों को देखो,
विचलित ना कर पाते हैं।
बहते झरनों से सीखो,
कितना चट्टानों से टकराते।
राहें कितनी भी मुश्किल हों,
उनको रोक ना पाते।
सुख-दुःख भी मेहमान हैं दोनों,
नित-नित आते-जाते।
समयानुसार बात अलग है,
कभी अधिक रुक जाते।
दुखों के बादल छँटेंगे जल्दी,
आयेगी भोर सुहानी।
घूमेंगे-फिरेंगे मौज करेंगे,
जीवन की यही कहानी।
रचयिता
बबली सेंजवाल,
प्रधानाध्यापिका,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय गैरसैंण,
विकास खण्ड-गैरसैंण
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

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