बात करें हम बचपन की
बात करें हम बचपन की,
प्यारे-न्यारे बचपन की।।
प्यारे इनको खेल खिलौने,
आँखों में हैं सपन सलोने।
ऐसे चंचल बचपन की,
बात करें हम बचपन की।।
मोटा-तगड़ा पतला -हड्डी,
खेल में अव्वल कोई फिसड्डी।
ऐसे अदभुत बचपन की,
बात करें हम बचपन की।।
गिल्ली-डंडा और कबड्डी,
कूद लगाते ऊँची बड्डी।
खेल-खिलाड़ी बचपन की,
बात करें हम बचपन की।।
जोज़फ जुम्मन उमा सुशीला,
वेश है इनका रंग रंगीला।
ऐसे सतरंग बचपन की,
बात करें हम बचपन की।।
कोई तो ऐसा काम करेंगे,
देश का ऊँचा नाम करेंगे।
अच्छे-अच्छे बचपन की,
बात करें हम बचपन की।।
झूठ-कपट का साथ न देंगे,
जिम्मेदारी हाथ में लेंगे।
ऐसे सच्चे सचपन की,
बात करें हम बचपन की।।
रचयिता
राजबाला धैर्य,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय बिरिया नारायणपुर,
विकास खण्ड-क्यारा,
जनपद-बरेली।

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