191/2025, बाल कहानी- 15 नवम्बर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात- 191/2025
*15 नवम्बर 2025 (शनिवार)*
#बाल_कहानी - #बम
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"हें! दिल्ली में लालकिला के निकट बम विस्फोट? फिर से आतंकवाद का घिनौना कृत्य सिर उठाने लगा है।" कहते हुए प्रकाश के पापा टीवी. पर आ रही ताजा खबरों से काफी विचलित से हो रहे थे। तीसरी कक्षा में पढ़ने वाला प्रकाश समझ नहीं पा रहा था कि बम इतना खतरनाक कैसे हो सकता है?
देर रात तक पापा टीवी. से चिपके रहे, जो निरन्तर आ रही बम विस्फोट की खबरों को जानने के लिए बेचैन हुए जा रहे थे। पापा की बेचैनी देख उसे उनसे बात करने का साहस नहीं हो पाया और न जाने कब उसे नींद ने अपने आगोश में ले लिया? पता ही नहीं चला।
सुबह आँख खुलने पर फिर वही। अब भी उसके पापा विस्फोट की खबरें आँख फाड़-फाड़कर देखते-सुनते जा रहे थे।
उधर उसकी माँ ने आवाज दी, "प्रकाश! मंजन करो बेटा.. जल्दी करो, बस का समय हो रहा है।" तभी प्रकाश दौड़कर पापा के पास जाकर बोला, "पापा दिवाली पर तो हमने कई सारे बम गली और छत पर फोड़े थे पर....? "
"अरे तू नहीं समझेगा, वो तो दिवाली के खिलौना बम हुए। उनके धमाके केवल आवाज के लिए किये जाते हैं। इन आतंकियों के बम तो काफी खतरनाक होते हैं, जिससे बहुत नुकसान होता है।" नन्ही-सी जान अब भी नहीं समझ पा रही थी कि वो आतंकी कौन होंगे? जो ऐसा खतरनाक काम कर लोगों को दु:खी कर जाते हैं, परेशान कर जाते हैं। आखिर ऐसा क्यों करते होंगे वो? तभी माँ ने झटपट उसे तैयार कर बस में बैठाकर विद्यालय को भेज दिया लेकिन कई सवाल अब भी उसके मासूम मन को बेचैन किए जा रहे थे।
#संस्कार_सन्देश -
बच्चों का मन निश्छल और पवित्र होता है। वे सभी को समान समझते हैं। उनमें भेद-भाव न होने के कारण दु:खी होना स्वाभाविक है।
कहानीकार-
#दीवान_सिंह_कठायत (प्र०अ०)
रा० आ० प्रा० वि० उडियारी बेरीनाग (पिथौरागढ)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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