192/2025, बाल कहानी- 17 नवम्बर

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 192/2025
*17 नवम्बर 2025 (सोमवार)*
 #बाल_कहानी - #आत्म_मुग्धता
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सीमा और रीमा बचपन से साथ खेल और पढ़ रही थीं क्योंकि दोनों के घर आस-पास ही थे।
दोनों ही स्कूल की मेधावी छात्राएँ थीं। सभी उनकी बुद्धिमता के साथ-साथ दोस्ती की भी मिसालें पेश करते थे।
अब दोनों सखियाँ धीरे-धीरे किशोरावस्था में प्रवेश कर रही थीं। इधर रीमा की गम्भीरता बढ़ रही थी, वहीं सीमा का स्वभाव और ज्यादा चंचल होता जा रहा था। सीमा के नैन-नक्श खूबसूरत थे, इसलिए अक्सर उसकी खूबसूरती की तारीफ होती तो वह इसे सुन सुनकर थोड़ा आत्म-मुग्ध रहने लगी।
इधर नैन-नक्श तो रीमा के भी अच्छे थे, पर उसका रंग थोड़ा साँवला था, लेकिन वह इन सब बातों पर कभी कोई ध्यान ही नहीं देता था ।
उसका मकसद था- पढ़-लिखकर बड़ी अफसर बनना। वह बचपन से ही ऐसे सपने देख रही थी।
हालाँकि बचपन से तो दोनों सखियों के सपने एक ही थे, पर अब सीमा के सपने बदलने लगे थे।
वह अपने-आपको कभी मॉडल समझती, कभी हीरोईन बनने के दिवास्वप्न उस पर हावी रहते।
सीमा अचानक ही रीमा से दूर-दूर रहने लगी। उसे अपनी खूबसूरती का बड़ा गुमान था। 
वह घन्टों आईने के सामने बैठे-बैठे निकाल देती। अपनी खूबसूरती बढ़ाने के लिए तरह-तरह के प्रयोग बालों और त्वचा पर करती रहती।
इधर रीमा ने जब उसके बदले बदले रंग-ढंग देखे तो उसे समझाने का प्रयास भी किया ।
लेकिन आत्म-मुग्धता की स्थिति में सीमा ने उसे टका-सा जबाब दे दिया क, "तुम मेरी खूबसूरती से जलती हो इसलिए ऐसा बोलती हो।"
रीमा के हृदय को इस बात ने वेध दिया कि बचपन की सखी उसके बारे में ऐसे विचार रखती है। अब रीमा स्वयं ही उससे दूर रहने लगी और सीमित वार्तालाप ही करती।
धीरे-धीरे समय गुजरने लगा। रीमा पढ़ाई में आज भी अव्वल रहती लेकिन सीमा पढ़ाई में पिछड़ गई थी।
उसका रिजल्ट और रंग-ढंग देखकर घरवालों ने उसे घर बिठा लिया और प्राइवेट परीक्षा देने के लिए कह दिया, जिसे सीमा ने सहर्ष स्वीकार भी कर लिया क्योंकि उसे तो पढ़ने से बचना था।
एक समय पश्चात रीमा प्रतियोगी परीक्षा पासकर प्रशासनिक अधिकारी बन गई और सीमा क्योंकि आगे पढ़ी ही नहीं तो शीघ्र ही उसकी शादी कर दी गई और वह गृहस्थी में रम गई। मॉडल बनने का सपना कहीं बहुत दूर छिटककर रह गया।
समय आने पर रीमा की शादी भी एक उच्चाधिकारी के साथ हो गई। समय अपनी रफ़्तार से चलता रहा।
कुछ वर्षों बाद दोनों सखियों का सामना एक बड़े स्कूल के वार्षिक समारोह में हुआ। जहाँ रीमा मुख्य अतिथि बनकर आयी थी जबकि सीमा एक अभिभावक के तौर पर उसमें सम्मिलित थी ।
सीमा ने रीमा को पहचान लिया फिर भी उसकी हिम्मत ही नहीं हुई उससे जाकर बात करने की। वह मन ही मन उदास थी। इधर रीमा ने देखा कि उसकी सखी उम्र से पहले ही बड़ी उम्र की दिखने लगी है और उदास है तो उसे अपने अधीनस्थ के जरिए अपने पास बुलाया और बड़ी आत्मीयता से बात करने लगी।
बातों-बातों में ही जब उसे लगा कि उसकी सखी हीनभावना से घिर गई है तो उसे ढ़ाढस बँधाया और साथ ही कहा कि, "अपनी बेटी को इस शारीरिक बनावट की आत्म-मुग्धता से दूर ही रखना। शारीरिक बनावट ईश्वर प्रदत्त होती है। इस पर न तो गुमान करना चाहिए और न ही कोई कमी होने पर हीनभावना से ग्रस्त होना चाहिए। असली पूँजी तो हमारे गुण हैं। हमें उन पर ही ध्यान देना चाहिए और हर हाल में गुणी बनना चाहिए।"
सीमा को यह बात समझ तो आ गई थी, लेकिन उसकी स्थिति वही थी कि, "अब पछताए होत क्या.....।"

#संस्कार_सन्देश -  
हमें शारीरिक बनावट ( सुन्दरता/ बदसूरती) को अत्यधिक महत्व नहीं देना चाहिए।

रचनाकार-
#पूनम_सारस्वत 'प्रज्ञा' (स०अ०) एकीकृत विद्यालय रुपानगला खैर, अलीगढ़ (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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