190/2025, बाल कहानी- 13 नवम्बर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 190/2025
*13 नवम्बर 2025 (गुरुवार)*
#बाल_कहानी - #तीन_सवाल
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राजू और मुनिया स्कूल में नैतिक शिक्षा के पीरियड में शिक्षिका द्वारा 'तीन सवाल कहानी' बड़े ध्यान से सुन रहे थे। मुनिया हमेशा की तरह कहानी से सम्बन्धित प्रश्न कर रही थी और राजू कभी मुनिया के प्रश्न पर खीझता और कभी कहानी समझ में न आने पर स्वयं पर। कहानी के अन्त पर सब बच्चों ने ताली बजायी और अनमने ढंग से राजू ने भी। छुट्टी हुई। मुनिया और राजू उछलते-कूदते घर की ओर चले।
"दादी..दादी हम आ गये।" सुनकर रोज की तरह दादी उनके स्वागतार्थ खड़ी थी। राजू और मुनिया दादी से लिपट गए। भोजन करते-करते न जाने कितनी बातें हुईं। अचानक राजू ने कहा, "दादी! आज टीचर ने कहानी तो बहुत अच्छी सुनाई थी, पर मेरी समझ में नहीं आई। कहानी में राजा को तो पता चल गया, सबसे अच्छा व्यक्ति कौन सा है, सबसे अच्छा समय कौन सा है और सबसे अच्छा काम कौन सा है? पर दादी मुझे समझ नहीं आया कि मेरे लिए सबसे अच्छा क्या है? क्या राजा की तरह मुझे भी जंगल में जाना पड़ेगा?"
"अरे नहीं राजू! पहले तुम ठीक से भोजन कर लो.. आराम कर लो और अभी सारे विषयों का होमवर्क भी तो करना है।"
बात आयी-गयी हो गई।
अगले दिन स्कूल में स्थानीय अवकाश था। गाँव का कोई मेला था। बच्चे दादी और माँ के साथ मेले में घूमने लगे। मेले में घूमते-घूमते राजू को रामू मिल गया। रामू उन्हीं के स्कूल में पढ़ता था, पर माँ की बीमारी के कारण स्कूल नहीं जा पा रहा था। रामू मिट्टी के सुन्दर खिलौने सजाए एक स्थान पर उन्हें बेचने के लिए बैठा था। उसके पिता भी मेले में मिठाई की दुकान लगाए थे। "अरे रामू! तुम्हारे खिलौने तो बहुत सुन्दर है!"
"हाँ, पहले माँ बनाती थी, पर अब बीमारी के कारण माँ ने ही मुझे भी सिखाया था।" तब तक दादी और मुनिया भी दुकान पर पहुँच गयीं। राजू दादी से कहने लगा, "दादी! रामू के सारे खिलौने खरीद लो, ताकि उसकी माँ का इलाज हो सके।"
"बात तो ठीक थी, पर सारे खिलौने तो खरीदे नहीं जा सकते थे। तब तक मुनिया भी दुकान पर पहुँच गयी। स्थिति भाँपते उसे देर न लगी। उसने कहा, "दादी! मेरी कुछ सहेलियाँ भी मेले में हैं। मैं उन्हें खिलौने और मिठाइयाँ खरीदने के लिए मनाती हूँ।" इधर राजू अपने दोस्तों को बुलाने भागा। मेहनत रंग लायी। देखते ही देखते रामू के अधिकाँश खिलौने और उसके पिता की मिठाई बिक गई। पिता-पुत्र के चेहरे खुशी से चमक उठे। आज तो बहुत अच्छी बिक्री हुई है। माँ के लिए अच्छी से अच्छी दवा आ जाएगी और यह सब राजू तुम्हारी वजह से।" रामू ने राजू का हाथ प्यार से पकड़ लिया। सब लोग खुशी-खुशी वापस घर लौटने लगे। रास्ते में राजू को अपने तीन सवालों की फिर याद आई।
"दादी..दादी! आप तो भूल ही गई। मेरे वे तीन सवाल..?"
"अरे, नहीं राजू! मैं भूली नहीं हूँ और मुझे लगता है कि तुम्हें समझ भी आ गया होगा।" राजू बगले झाँकने लगा। अब मुनिया क्यों चुप रहती?
"अरे! आज सबसे जरूरी और अच्छा व्यक्ति तुम्हारे लिए कौन था?"
"रामू।" राजू ने कहा।
"और सबसे अच्छा समय?"
"मेले में घूमना।"
"और सबसे अच्छा काम?"
"रामू की मदद। मुझे कहानी समझ में आ गई। राजू खुशी से चिल्लाया! दादी माँ और मुनिया एक साथ हँसने लगे।
#संस्कार_सन्देश -
अच्छा समय, अच्छा कार्य और अच्छा व्यक्ति सामने ही होते हैं बस! उन्हें पहचानना होता है।
कहानीकार-
डॉ० #सीमा_द्विवेदी (स०अ०)
कम्पोजिट विद्यालय कमरौली जगदीश पुर, अमेठी (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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