199/2025, बाल कहानी- 26 नवम्बर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 199/2025
26 नवम्बर 2025 (बुधवार)
#बाल_कहानी- #रिंकू_और_मगरमच्छ
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एक दिन की बात है, शहर में रहने वाले बलदेव और उनके चार पोते शुभम, निशा, कोमल और रिंकू भ्रमण पर एक गाँव आये। उस गाँव को उन्होंने केवल यूट्यूब पर देखा था। उस गाँव में एक बड़ा जंगल था, जहाँ पर एक सुन्दर झरना था। उसे देखने के लिए वे सभी आये थे। वहाँ गाँव में लोगों ने उनका स्वागत किया और उनको झरना दिखाने के लिए सुबह जंगल में लेकर गये। सभी बहुत खुश थे। जब झरने के पास पहुँचे तो सबने उस झरने में स्नान किया और आनन्द लिया। रिंकू को बहुत आनन्द आ रहा था। वह स्नान करते हुए पानी में खेल रहा था। तभी अचानक से एक मगरमच्छ आ गया और रिंकू की ओर बढ़ने लगा। सारे बच्चे अपने-अपने काम में मस्त थे। किसी की दृष्टि रिंकू की तरफ नहीं थी। रिंकू के दादा जी सबकी निगरानी करते रहते थे। रिंकू के दादा जी बलदेव जी ने मगरमच्छ को देख लिया। वे तुरन्त ही चिल्लाये, पर झरना के गिरने की आवाज से रिंकू को सुनाई नहीं दिया। बड़ी मुश्किल से बलदेव पानी में छलाँग लगाकर रिंकू को बचाने के लिए कूद गया और रिंकू को पकड़कर वहाँ से बाहर निकाला। इसको देखकर सब लोग अचम्भित हो गये। वह मगरमच्छ बहुत बड़ा था, यदि रिंकू को पकड़ लेता तो उसे निगल ही जाता। लेकिन रिंकू के दादा जी बलदेव रिंकू को बचाने में सफल रहे। थोड़ी सी देर हो जाती तो वह मगरमच्छ रिंकू को अपना आहार बना लेता।
रिंकू के दादा जी बलदेव बहुत अनुभवी थे। वह अपने पोतों की सुरक्षा के लिए उनके साथ गये थे। उनके कारण ही रिंकू की जान बची। इसलिए कहीं भी भ्रमण पर जायें तो किसी अनुभवी आदमी या अपने घर के किसी बड़े व्यक्ति को लेकर जरूर जायें।
#संस्कार_सन्देश -
हमें कहीं भी भ्रमण पर अकेले नहीं जाना चाहिए। किसी अनुभवी व्यक्ति को साथ जरुर ले जाना चाहिए।
कहानीकार-
#प्रेमलाल_किशन (स०शि०)
शासकीय प्राथमिक विद्यालय बुढ़नपुर
विकासखण्ड व जिला- सक्ती (छत्तीसगढ़)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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