196/2025,बाल कहानी- 21 नवम्बर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 196/2025
*21 नवम्बर 2025 (शुक्रवार)*
#बाल_कहानी - #मनहूस
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घर में गम का माहौल है। चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है। भुवन के पार्थिव शरीर को शमशान ले जाने की तैयारी चल रही है। सबकी जुबान पर बस एक ही लाइन है-, "मनहूस कहीं की.. एक तो लड़की के रूप में जन्म लिया है, ऊपर से पैदा होते ही बाप को खा गई।" शादी के दस साल बाद जानवी माँ बनी थी। वो अपनी बच्ची को दुनियाभर की खुशियाँ देने का सपना अपने दिल में लिये थी, लेकिन समय को कुछ और ही मंजूर था। बच्ची के जन्म के दो दिन बाद ही भुवन की एक कार एक्सीडेंट मे मौत हो गई। जानवी पर दु:ख का पहाड़ टूट पड़ा। सब उसकी बच्ची को कोस रहे थे। वह लाचार नजरों से सबकी ओर देख रही थी, मानो कह रही हो कि, "इसमें इस दूध-मुँही बच्ची का क्या कसूर है? ये तो बस समय का खेल है।"
धीरे-धीरे समय बीतता जाता है। जानवी भी अपना गम भूलकर अपनी जिन्दगी में आगे बढ़ती है। वह अपनी बेटी जीवा को दुनियाभर की खुशियाँ देना चाहती है। जीवा पन्द्रह साल की हो चुकी है। वह बहुत-ही सुन्दर और होशियार बच्ची है। हमेशा कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करती है। खेल में भी जीवा अव्वल है।
आज जीवा का हाईस्कूल का रिजल्ट आने वाला है। वह बेसब्री से रिजल्ट के इन्तजार में बैठी है। तभी उसकी दादी आवाज लगाती है, "ओ! मनहूस कहाँ मर गई? पानी लेकर आ! मारे प्यास के मेरा गला सूखा जा रहा है। पास भी हो गई तो कौन-सा राज-पाट मिल जायेगा तुझे?" यह सब-कुछ सुनकर वह रोने लग जाती है। जीवा को दादी की कही हुई बात बहुत बुरी लगती है, लेकिन माँ के समझाने पर वह चुप होकर अन्दर चली जाती है। तभी अखबारवाला आता है, जीवा अपना रिजल्ट देखने लग जाती है। उसने पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। वह खुशी से झूम उठती है। जानवी भी अपनी बेटी की सफलता पर बहुत गर्व महसूस करती है, लेकिन दादी को इस सबसे कुछ फर्क नहीं पड़ता।
जीवा कालेज में दाखिल ले लेती है और मन लगाकर आगे की पढ़ाई में जुट जाती है।
घर में मेहमान आये हुए हैं। दादी जीवा की शादी करवाना चाहती है। वह जल्द से जल्द उस मनहूस को अपनी जिन्दगी से निकालना चाहती है। जानवी और जीवा दोनों ही इस शादी के खिलाफ है, लेकिन दादी किसी की नहीं सुनती और रिश्ता तय कर देतीं हैं। एक हफ्ते बाद का मुहुर्त निकलता है। घर में शादी की तैयारी शुरु हो जाती हैं। जीवा और जानवी दोनों ही उदास हैं। जीवा आगे पढ़कर डाक्टर बनना चाहती है। बिना कुछ सोचे-समझे जीवा घर छोड़कर चली जाती है।
धीरे-धीरे करके दस साल बीत जाते है। दादी बहुत बीमार है, बिस्तर पर लगी हुई है। डाक्टर जवाब दे चुके है। दादी को बचाने का केवल एक ही रास्ता है, दो घण्टे के अन्दर उनका आपरेशन कर दिया जाये। आपरेशन का खर्च दस लाख है। जानवी बहुत परेशान है, करे तो क्या करें? तभी अचानक से देश की जानी मानी सर्जन डाक्टर शर्मा आती हैं। जानवी उनको देखकर चौंक जाती है, क्योंकि वो डाक्टर कोई और नहीं बल्कि उनकी बेटी जीवा है। जीवा अपनी माँ को देखकर रो पड़ती है। जब उसको सारी बात पता चलती है, तो वह तुरन्त दादी का आपरेशन करती है। इस तरह दादी की जान बच जाती है। जब दादी को सब बात का पता चलता है, तो वह अपने किये पर बहुत शर्मिन्दा होती है। दादी जीवा से माफी माँगती है और उसको गले से लगाकर कहती है कि "बेटी अभागी और मनहूस तू नहीं बल्कि तेरी ये दादी है, जो तेरे प्यार से अन्जान रही।
संस्कार सन्देश -
बेटी को आगे बढ़ने के मौके देने चाहिए।
कहानीकार-
#ब्रजेश_सिंह (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय बीठना
लोधा, अलीगढ़ (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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