200/2025, बाल कहानी- 27 नवम्बर

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 
200/2025
*27 नवम्बर 2025 (गुरुवार)*
#बाल_कहानी - #उत्तम_स्वास्थ्य
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राहुल शहर में प्राइवेट नौकरी करता था। उसकी पत्नी रीना सरकारी स्कूल में अध्यापिका थी। मोनू और सोनू उनके दो बेटे थे। राहुल के माता-पिता भी उनके साथ रहते थे।
दोनों बच्चे एक ही स्कूल में पढ़ते थे। दोनों बच्चे पढ़ाई में बहुत होशियार थे। इस कारण सभी अध्यापक उन्हें पसन्द करते थे। वे दादा-दादी के लाडले भी थे।
सोनू और मोनू की माँ उनके लिए समय पर नाश्ता तैयार करती थी और लंच भी तैयार करके उनको देती थी, फिर भी सोनू और मोनू पैसे के लिए जिद करते थे। वे प्रतिदिन अपनी दादी से बीस रुपये लेकर स्कूल जाते थे। 
सोनू और मोनू स्कूल जाते समय रास्ते में दुकान से चीज लेकर खाया करते थे। उनके माता-पिता उन्हें प्रतिदिन समझाते कि, "बाहर की चीजों से स्वास्थ्य खराब हो जाता है और बीमारियाँ हमें घेर लेती हैं। हमें घर का बना शुद्ध खाना खाना चाहिए।" पर सोनू और मोनू उनकी बात को सुनकर भी अनसुना कर देते थे।
सोनू और मोनू की वार्षिक परीक्षाएँ चल रही थी। वह विद्यालय के लिए निकलते हैं।
जैसे ही वे स्कूल पहुँचे, तभी मोनू के पेट में जोर-जोर से दर्द होने लगा। पेट दर्द इतना ज्यादा हो रहा था कि मोनू रोने लगा। अध्यापक ने उसे तुरन्त अस्पताल पहुँचा दिया। जैसे ही ये खबर सोनू के माता-पिता को मिली, वे तुरन्त अस्पताल पहुँचे, जहाँ डॉक्टर ने बताया कि, "उसे फूड प्वाइजनिंग हो गई है और यह बाहर का खाना खाने से हो जाती है।"
सोनू और मोनू को अपनी गलती का एहसास हो गया। उन्होंने माता-पिता से वादा किया कि, "आज के बाद वे बाहर का कोई भी खाना नहीं खायेंगे। घर का बना खाना ही खायेंगे।"
माँ भी उन्हें समझाती हैं कि, "अगर हम घर का बना पौष्टिक खाना खाते हैं तो हमारा स्वास्थ्य उत्तम रहता है और हमें बीमारियाँ भी नहीं होती।"

#संस्कार_सन्देश - 
हमें घर का बना खाना खाना चाहिए। घर का बना खाना स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है, जिससे हमारा स्वास्थ्य अच्छा रहता है।

कहानीकार-
#मृदुला_वर्मा (स०अ०)
प्रा० वि० अमरौधा प्रथम
अमरौधा (कानपुर देहात)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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