195/2025, बाल कहानी- 20 नवम्बर

#दैनिक_नैतिक_प्रभात- 195/2025
20 नवम्बर 2024 (गुरुवार)
कहानीकार- कोमल की कुशलता
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एक शर्मा परिवार था, जिसमें कोमल नाम की एक बहुत ही सुशील ओर होशियार लड़की थी। कोमल की दादी कोमल को स्कूल नहीं भेजना चाहती थी। वह सदैव कहती रहती थी कि लड़कियों को ज्यादा नहीं पढ़ना चाहिए, अगर वह ज्यादा पढ़ जाती हैँ, तो उनकी बुद्धि खराब हो जाती है। वह घर में तथा घर के बाहर किसी की भी नहीं सुनती है। जब देखो जब लड़ने को तैयार रहती हैँ । इसलिए दादी अपनी पोती कोमल को स्कूल नहीं भेजना चाहती थी । कोमल स्कूल जाने के लिए जिद करती थी।
एक दिन तो हद हो गई कोमल ने कह दिया, "मै कल से स्कूल अवश्य जाऊँगी, चाहे जो हो मुझे तो पढ़ाई करनी है " दादी जी ने भी कह दिया, "बेटी! स्कूल जाना है तो जाओ, लेकिन स्कूल नदी के पार है, तो कैसे जाओगी?" कोमल ने कहा, "दादी मै पैदल स्कूल चली जाऊँगी " बस, वह स्कूल जाने लगी। 
एक दिन उसे मार्ग में कुछ गन्दे लोग मिले तो कोमल ने उनकी तरफ ध्यान नहीं दिया ओर स्कूल की तरफ चली गई। दूसरे दिन फिर उन लोगों ने कोमल को परेशान किया तो कोमल ने भी अपने हुनर से उन सबके छक्के छुड़ा दिए और स्कूल पहुँच गयी। अध्यापिका जी ने देखा कि कोमल आज कुछ परेशान है, उसके हाथ-पैर में कुछ चोट के निशान भी दिख रहे थे। तब अध्यापिका जी ने पूछा, "कोमल! आज क्या कुछ दिक्क़त हुई थी?" कोमल बस फूट-फूटकर रोने लगी और सारी बात बतायी। अध्यापिका जी ने कोमल को बहुत शाबासी दी ओर कहा, "तुम्हें डरने कि कोई जरुरत नहीं है, बस, इसी तरह बहादुरी से सबका सामना करना।"
अध्यापिका जी ने इसकी शिकायत पुलिस में की। पुलिस ने उन लड़कों को पकड़कर जेल में डाल दिया। साथ ही उनके कर्मों के लिए उन्हें सजा भी दी।

#संस्कार_सन्देश -
सच! अगर हम अपनी लड़कियों को बहादुरी के पाठ के साथ कुछ तरीके बचाव जैसे- जुडो-कराटे आदि अपनी सुरक्षा के बतायें तो कभी भी कोई अनहोनी से बचा जा सकता है।

कहानीकार-
#अंजनी_अग्रवाल (स०अ०) 
उच्च प्राथमिक विद्यालय सेमरुआ, सरसौल (कानपुर नगर)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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