201/2025, बाल कहानी- 28 नवम्बर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 201/2025
*28 नवम्बर 2025 (शुक्रवार)*
#बाल_कहानी - #मीना_की_सीख
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गर्मी की छुट्टियाँ हो गई थीं। मीना खुशी-खुशी नानी के घर जाने की तैयारी कर रही थी। नानी के घर जाने की बात वह अपने सभी दोस्तों को बता रही थी। मीना अपनी दोस्त नैना से बोली,
“सुन नैना! मैं तो अपनी नानी के घर जा रही हूँ। वहाँ मेरे और भी बहुत सारे दोस्त हैं, जिनके साथ मैं दिन-भर खेलूँगी। इतने दिनों बाद छुट्टियाँ मिली हैं। पढ़-पढ़कर ऊब गई हूँ, अब तो खूब मजे करूँगी।”
मीना खुशी के मारे फूली नहीं समा रही थी। नैना ने पूछा, “अच्छा, स्कूल में जो गृहकार्य दिया गया है, उसका क्या?”
मीना ने बुरा-सा मुँह बनाकर कहा, “छुट्टियाँ मज़े करने के लिए होती हैं, न कि काम करने के लिए। मैं तो नहीं कर रही कोई काम।”
नैना ने कहा, “मैं भी कल नानी के घर जा रही हूँ, लेकिन मैं अपने साथ कॉपी-किताब भी लेकर जाऊँगी। दिन-भर खेलूँगी और शाम को एक घन्टा बैठकर काम कर लूँगी, नहीं तो मैडम बहुत नाराज होंगी।”
मीना हँसते हुए बोली, “डरपोक कहीं की! चल, तू काम करना, मैं तो सिर्फ मस्ती करूँगी।”
देखते-ही-देखते छुट्टियाँ समाप्त हो गईं। सभी अपने-अपने घर लौट आये। विद्यालय खुल गया। शिक्षिका ने बच्चों से गृहकार्य के बारे में पूछा। मीना खामोश खड़ी रही। शिक्षिका समझ गई कि मीना ने गृहकार्य नहीं किया है। कक्षा के सभी बच्चों ने अपना-अपना गृहकार्य शिक्षिका को दिखाया। यह देखकर मीना बहुत शर्मिन्दा हो गई।
शिक्षिका ने कहा, “जिन बच्चों ने गृहकार्य किया है, उन्हें मैं इनाम में उनकी पसन्द की चॉकलेट दूँगी।”
यह सुनकर मीना का मन बहुत ललचाया। उसे मन-ही-मन बहुत पछतावा हुआ। वह सोचने लगी कि, "काश! वह भी रोज़ थोड़ा-सा समय निकालकर गृहकार्य कर लेती, तो आज उसे भी चॉकलेट मिलती।" उसने मन ही मन निश्चय किया कि, "आगे से वह खेल के साथ-साथ पढ़ाई भी जरूर करेगी।"
#संस्कार_सन्देश#
छुट्टियों में खेल-कूदना और घूमना जरूरी है, लेकिन पढ़ाई और गृहकार्य को भी भूलना नहीं चाहिए।
कहानीकार -
#रुखसार_परवीन (स०अ०)
संविलयन विद्यालय गजपतिपुर
बहराइच (उ०प्र०)
📝संकलन
📝टीम-#मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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