185/2025, बाल कहानी- 07 नवम्बर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 185/2025
07 नवम्बर 2025 (शुक्रवार)
#बाल_कहानी- #चिड़िया_के_बच्चे
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भूमि को आँगन में चिड़ियों को चलते-फिरते, उड़ते देखना और उनकी चूँ-चूँ-चूँ की आवाजें सुनना बहुत अच्छा लगता था। जब उसके आँगन में कोई चिड़िया आकर इधर-उधर फुदकती और उड़ती, तब उसे बहुत मजा आता था। वह भी चिड़ियों के साथ दौड़ती और उनके पीछे-पीछे भागती और उछल-कूद करती। इस प्रकार भूमि का रोज का यही क्रम था। भूमि अभी तीन वर्ष की ही थी।
दिन बीतते गये। नर-मादा चिड़िया ने घोंसला बनाना आरम्भ किया। भूमि अपनी दादी से पूछती, "दादी! ये दोनों चिड़ियाँ यहाँ तिनके क्यों ला रही है और फिर तिनके रखकर कहाँ चली जाती है?"
"बेटा! ये अपने बच्चों के लिए घोंसला बना रहे हैं? दादी ने खुश होकर कहा।
"लेकिन दादी! इसके बच्चे कहाँ हैं? हमें तो दिखाई नहीं देते हैं..."
"चिड़िया के बच्चे चिड़िया के पेट में हैं, जैसे पहले तुम भी अपनी माँ के पेट में थी, फिर तुम्हारा जन्म हुआ।"
"दादी! चिड़िया के बच्चे कब जन्म लेंगे?" भूमि की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी।
"एक महीने बाद। पक्षी बच्चों के जन्म के एक-दो महीने पहले घोंसला बनाना प्रारम्भ कर देते हैं। जैसे ही घोंसला पूरा बन जायेगा, चिड़िया अपने बच्चों को जन्म देगी।"
"एक महीना कब निकलेगा दादी जी!"
"तीस दिन बाद..।" दादी बोली।
समय बीतने के साथ धीरे-धीरे एक महीना भी बीत गया। चिड़िया ने अपने घोंसले में तीन अण्डे दिए। अण्डों को देखकर भूमि फिर अपनी दादी से बोली, "दादी...दादी! आपने तो कहा था कि एक महीने बाद चिड़िया बच्चों को जन्म देगी, ये तो अण्डे हैं! बच्चे कहाँ हैं?"
"कुछ दिनों के बाद बच्चे इन्ही अण्डों में से निकलेंगे, जब अण्डे फूटेंगे।"
दादी के कहे अनुसार कुछ ही दिनों में अण्डे फूटे और उसमें से नन्हे-नन्हे कोमल बच्चे बाहर निकल आये। दादी भूमि को बच्चों के पास लेकर गयी। भूमि बच्चों को देखकर बहुत खुश हुई।
भूमि रोज उनके पास रहकर उनकी देख-भाल करती।
#संस्कार_सन्देश -
बच्चों का पेड़-पौधौं और पक्षियों से लगाव स्वाभाविक होता है। हमें उन्हें प्रकृति से जोड़ने में मदद करनी चाहिए।
कहानीकार-
#जुगल_किशोर_त्रिपाठी
प्रा० वि० बम्हौरी (कम्पोजिट)
मऊरानीपुर, झाँसी (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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