202/2025, बाल कहानी- 29 नवम्बर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 202/2025
*29 नवम्बर 2025 (शनिवार)*
#बाल_कहानी - #चतुर_गढ़रिया
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एक गाँव में एक चतुर गढ़रिया रहता था। उसके पास बहुत-सी भेड़ें थीं। सुबह से दोपहर तक वह पास की पहाड़ी पर अपनी भेड़ों को चराता था और दोपहर बाद नहा-धोकर, खाना खाकर लोगों के बीच में बैठता था। पास में ही वहीं एक विशाल बरगद का वृक्ष था, जिसकी घनी छाँव दूर-दूर तक फैली रहती थी। सभी लोग खाली समय में आकर वहाँ गपशप करते, कुछ लोग वहाँ ताश और कुछ लोग चौपड़ खेलते थे। कुछ लोग धर्म की चर्चा करते और कुछ राजनीति और घर-परिवार तथा खेती-बाड़ी की। वह गढ़रिया वहीं रोज आकर बैठता और सबकी बातें सुनता और गुनता।
बहुत दिन बीते, अब गढ़रिया सबकी बातों से हर काम में होशियार हो चुका था। वह खेती-बाड़ी में नये उन्नत बीजों, खाद और दवाइयों का प्रयोग करता। लोगों से कैसे काम निकालना है, इसके लिए राजनीति अपनाता, बच्चों को कैसे और कहाँ पढ़ाना है, सरकार की फीसमाफी और अन्य योजनाओं तथा आयुष्मान योजना का लाभ कैसे लेना है? इसके लिए सदा प्रयासरत रहता। कुछ दिनों बाद उसने लाॅन पर पैसे उठाकर चार भेजें ले लीं और उनकी सेवा करता। दूध डेयरी में दूध बेचता। इससे उसे अच्छी आमदनी होने लगी और साल-भर में ऋण से मुक्त हो गया। उसने किसान क्रेडिट कार्ड भी बनवा लिया, जो भारी जरुरत के समय उसकी मदद करता।
आज उसके बच्चे पढ़-लिखकर अच्छी सरकारी नौकरी पा चुके थे। उनकी शादी अमीर घरानों में हुई, जिससे उसका रुतवा और भी बढ़ गया। इतना होने पर उसने सदा अपने बच्चों को यही शिक्षा दी कि, "कभी किसी से गलत या झूठ मत बोलना, किसी का अपमान मत करना और अहंकार तो भूलकर भी मत करना। सभी की बातें प्रेम से सुनना और हर कहीं से कुछ न कुछ जानने की जरूर कोशिश करना। मैंने सुना है कि दत्तात्रेय ने अपने चौबीस गुरु बनाये थे, जिनमें नर-नारी, चोर-बदमाश, पक्षी और पेड़-पौधे भी शामिल थे। इन सबसे उन्होंने कुछ न कुछ सीखा और लोगों को बताया। श्रीकृष्ण भी जहाँ से ज्ञान और सत्संग मिलता, वहाँ जरुर जाते और कुछ सीखते। सच्चा साधक और कर्मयोगी वही है, जो सबकी सुने, सबसे सीखे और फिर उसके अनुसार विवेक से कार्य करे। अगर कोई कार्य न बन पड़े तो किसी बुद्धिमान या बुजुर्ग व्यक्ति की सलाह लेना न भूलें, फिर उसमें अपने व दूसरों के हित-अहित का विचारकर कार्य करे।" उसके बच्चों ने पिता की सीख सहर्ष स्वीकार की और उसी के अनुसार सदा कार्य किया और सफलतापूर्वक जीवन व्यतीत किया।
#संस्कार_सन्देश -
हमें अपने माता-पिता और बड़ों की सीख का पालन कर सबसे प्रेम करना चाहिए।
कहानीकार-
#जुगल_किशोर_त्रिपाठी
प्रा० वि० बम्हौरी (कम्पोजिट)
मऊरानीपुर, झाँसी (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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