184/2025, बाल कहानी- 06 नवम्बर

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 184/2025
06 नवम्बर 2025 (गुरुवार)
#बाल_कहानी - #चाची_की_चुनरी
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"अरे-अरे..चीनू सँभल के ---! " चाची आगे-आगे चल रही नटखट चीनू को ठोकर खा सड़क से नीचे गिरते देखते ही झटपट चीखते हुए बोल उठी। देखते ही देखते चीनू गड्ढे में जा गिरी, जहाँ तीखे पत्थर से टकराते हुए उसका सिर फट गया। काफी गहरा घाव, रक्तरंजित कपड़े तथा दर्द से कराहती नन्ही जान अब पहचानी नहीं जा रही थी। अन्य साथियों के सहयोग से चाची ने तुरन्त चीनू को गड्ढे से निकालकर सड़क किनारे बिठाते हुए अपनी चुनरी को फाड़कर उसके जख्म को कसकर बाँध दिया और 108 नंबर पर फोन कर एंबुलेंस बुलाकर उसे अस्पताल में भर्ती कर दिया। नन्ही बच्ची को क्षण भर में लगी भारी चोट से चाची काफी क्षुब्ध हो उठी थी। जल्दबाजी में चुनरी का शेष भाग जाने कहाँ छूट गया ? उन्हें पता ही नहीं चला। 
तीन-चार दिन अस्पताल में रहने के उपरान्त चीनू को छुट्टी देते हुए अब सप्ताह भर बाद पुनः चिकित्सालय में आकर टाँके काटने की बात डाक्टर द्वारा उन्हें बता दी गई।
हफ्तेभर बाद चीनू अपने पापा के साथ स्कूटी से अस्पताल जा रही थी कि तभी जहाँ वह तब गिरी थी, वहाँ एक गाय अपने मुँह में कुछ चबाती हुई‌ नजर आई। पास आते ही "पापा रुको..पापा रुको, चाची की चुनरी गैया चबा रही। रोको उसे.. मेरी चाची की चुनरी मुझे लाकर दो, मुझे लाकर दो" कहते हुए जोर-जोर से रोने-चिल्लाने लगी। उसके पापा ने तुरन्त स्कूटी रोक गाय के मुँह से चुनरी छुड़ा ली और फटी, चबाई चुनरी चीनू को देते हुए कहा, "अरे! अब क्या करेगी इसका?" लेकिन चीनू बिना कुछ बोले मुड़ी-तुड़ी चुनरी को बडे़ जतन से सँभालने की कोशिश करने लगी। पापा ने बच्ची का लगाव देख चुनरी को एक थैली में पैककर डिक्की में रख दिया। अस्पताल में टाँके काटकर घाव पर मरहम पट्टी लगाकर दोनों घर वापस आ गये। चीनू ने "मेरी चाची की चुनरी मिल गई ... मेरी चाची की चुनरी मिल गई" का शोर मचाते हुए डिक्की में रखी थैली निकालकर मुड़ी-तुड़ी चबाई चुनरी चाची के हाथों में रख दी और चाची से लिपट गई। नन्ही जान का विलक्षण वात्सल्य देख चाची के भी आश्चर्य का ठिकाना न रहा। वह चीनू को गोदी में उठाकर प्यार से उसे सहलाने लगी। नन्ही चीनू की आँखों में अभी असीम सम्मान का भाव देखते ही बन रहा था, जिसे देखकर चाची की आँखें भी डबडबा आईं।

#संस्कार_सन्देश -
हमें घायलों और बीमारों की समय-समय पर सहायता करते रहना चाहिए, यही सच्ची मानवता है।

कहानीकार- 
#दीवान_सिंह_कठायत ( प्र०अ०)
रा० आ० प्रा० वि० उडियारी बेरीनाग, पिथौरागढ़ उत्तराखण्ड)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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