183/2025, बाल कहानी- 04 नवम्बर

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 183/2025
04 नवम्बर 2025 (मंगलवार)
#बाल_कहानी - #आत्म_विश्वास
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धीमी चाल से चलते हुए रेवती पुल तक पहुँच गई। यह बहुत पुराना पुल है। आवागमन नाममात्र का ही होने के कारण यहाँ नीम की खामोशी में बस पक्षियों का कलरव ही सुनाई देता है। कभी-कभी दूर स्थित मुख्य मार्ग से टायर फटने की आवाजों की गूँज भी सुनाई दे जाती है।
वह अपने ख्यालों में गुम भारी कदमों से आगे बढ़ी जा रही थी।
रेवती ऊपर से जितनी शान्त दिख रही थी, उसके अन्तर्मन में उतना ही तूफान उठा था। 
"सब कुछ करके भी मैं कभी इस परिवार की न हो सकी, बस ताने उलाहने और 'पराई हो तुम' का दंश ही झेलती रही हूँ। क्यों न मैं इस नदी में ही समा जाऊँ?" 
यह सोचते-सोचते ही रेवती ने ध्यान से कलकल बहती नदी की ओर देखा और अचानक ही उसने सोचा कि, "यह भी तो कितनों की प्यास बुझाती है, पर बदले में लोग इसे क्या देते हैं, कूड़ा कचरा, मन्दिर के अवशेष ही न? तो क्या यह अपना बहना रोक देती है? नहीं न? फिर मैं क्यों जीना छोडूँ? मैं क्यों अपनी जान व्यर्थ लोगों के लिए ले लूँ? न हो उन्हें मेरी कद्र, मैं स्वयं अपनी कद्र अवश्य करूँगी।
आज से मैं भी पहले अपने लिए जीऊँगी। बाद में किसी और का देखूँगी। थोड़ा खुदगर्ज तो मुझे होना ही होगा।" 
एक नए आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ वह नदी किनारे वापस चल पड़ी।

#संस्कार_सन्देश-
समाज में लड़कियों भी लड़कों जैसा सम्मान मिलना चाहिए ताकि भविष्य में उनके मन में कोई दंश पैदा न हो।

रचना:- 
#पूनम_सारस्वत 'प्रज्ञा' (स०अ०)
एकीकृत वि० रुपा (नगला)
खैर, अलीगढ़ (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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