189/2025, बाल कहानी- 12 नवम्बर

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 189/2025
12 नवम्बर 2025 (बुधवार)
#बाल_कहानी - #असली_दीपावाली
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दीपावली का दिन है। ओम आज बहुत खुश है। उसके पापा घर आने वाले है। वह विदेश में नौकरी करते हैं। घर की डोरबैल बजती है। ओम खुशी से उछल-कूद करने लगता है, "वाह! "पापा आ गये..पापा आ गये।" कहके तुरन्त गेट खोलकर पापा के गले से लिपट जाता है। पिता भी अपनी एकलौती सन्तान को देखकर खुशी से रो पड़ते हैं। बैग वहीं गेट पर ही पटककर वे ओम को गोदी में उठाकर लाड़-प्यार करने लगते हैं। उनके घर में कदम रखते ही दीपावली की रौनक आ जाती है। मानो असली दीपावली अब आयी है। ओम की माँ उनको पानी लाकर देती है। जैसे ही वे पानी पीकर ग्लास मेज पर रखते हैं। ओम पटाखे लाने के लिए जिद करने लगता है। सब लोग बाजार जाने के लिए तैयार हो जाते हैं।
बाजार की रौनक देखते ही बनती है। पूरा बाजार रंग-बिरंगी लाइटों से सजा हुआ है। वे लोग बहुत सारे कपड़े, जेवर, खिलौने, मिठाई आदि खरीदते हैं। ओम का मन अभी स्थिर नहीं है, क्योंकि अभी उसके पटाखों की शापिंग तो हुई ही नहीं है। पापा-मम्मी उसको समझाते है कि, "बेटा! पटाखे यहाँ बाजार में नहीं मिलते हैं। पटाखों का बाजार अलग लगता है।" ओम अब खुश हो जाता है। वे सब मिलकर पटाखे खरीदने चले जाते हैं। ओम बहुत खुश हुआ, क्योंकि अब उसको पटाखे मिलने वाले हैं। वह खूब सारे पटाखे, फुलझड़ी, अनार और अनेक तरह-तरह के पटाखे खरीद लेता है। पटाखे पाकर ओम की खुशी देखते ही बनती है। 
सारा सामान गाड़ी में रखकर वे घर के लिए निकल पड़ते हैं। चौराहे पर लाल सिग्नल हो जाता है। सभी गाड़ियाँ रूक जाती हैं। तभी एक ट्रक खराब हो जाता है और पूरा रोड़ जाम हो जाता है। काफी देर हो जाती है। ओम शोर करने लगता है, "मुझे पटाखे जलाने है।" माँ उसे समझाती है कि, "बेटा! जैसे ही जाम खुलता है, हम घर जाकर पटाखे जलायेंगे।" ओम रोने लगता है और अभी पटाखे जलाने की जिद करने लगता है।
एक छोटी-सी बच्ची जिसकी फ्राॅक फटी हुई है, तभी गाड़ी के बाहर आकर ओम की तरफ देखने लगती है, मानो उससे कह रही हो कि "मुझे ये पटाखे दे दो।" उसकी ऐसी हालत देखकर ओम के पिताजी उस लड़की को पाँच सौ रुपये दे देते हैं। तभी पता नहीं ओम को क्या सूझता है? वह अपने सारे पटाखे उस लड़की को दे देता है। वह बहुत खुश होता है और अपने पापा से कहता है कि, "पापा! हमारे पास तो बहुत सारे पैसे है। हम लोग और पटाखे खरीद सकते है।" यह सब-कुछ देखकर उसके माता-पिता को अपने बेटे पर बहुत गर्व महसूस होता है। वे उसको दोबारा बाजार ले जाते हैं और फिर से बहुत सारे पटाखे दिलवा देते हैं। सब घर आकर हँसी-खुशी मिलकर दीपावली मनाते हैं।

संस्कार सन्देश- 
हमें सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमन्द की सहायता अवश्य करनी चाहिए।

कहानीकार-
#ब्रजेश_सिंह (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय बीठना
लोधा, अलीगढ़ (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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