198/2025, बाल कहानी - 24 नवम्बर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात- 198/2025
*24 नवम्बर 25 (सोमवार)*
#बाल_कहानी- #चने_का_साग
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धरती पर संध्या उतर आयी थी। आँगन में खड़ी तुलसी की क्यारे में दीपक जल रहा था। माँ चने का साग बनाकर चूल्हे पर चावल की रोटियाँ पका रही थी।
तभी आठ वर्ष का मुकुल बाहर से खेल कर दौड़ता हुआ माँ के पास आया और मुँह लटकाये हुए माँ से बोला, "माँ! मुझे बहुत जोर से भूख लग रही है। जल्दी से खाना दो।"
"अभी रुको बेटा! पहले हाथ-पैर धोकर आओ।" माँ ने ममता भरे शब्दों में मयंक से कहा।
"ठीक है माँ! मैं अभी हाथ-पैर धोकर आता हूँ।" मयंक ने कहा। माँ ने दो रोटी में कुछ मीठा रखकर मयंक के हाथ में दिया और कहा, "पहले गौशाला में गौ माता को खिलाकर आओ, जिसके दूध से बना हम दही-मट्ठा, मक्खन और घी खाते हैं। उसके बाद दरवाजे पर बैठे शेरू को खिला कर आओ, जो हमारे घर की रखवाली करता है।
'लो, पहले अपने दादाजी को भोजन देकर आओ।" भोजन की थाली मयंक के हाथों में पकड़ाते हुए माँ ने प्यार से कहा।
"ठीक है माँ!" मयंक ने थाली पकड़ते हुए कहा और भोजन की थाली दादा जी के सामने रख दी। "दादाजी भोजन कर लो!" दादा जी ने मयंक का हाथ पकड़ कर अपने साथ बिठा लिया और अपने साथ भोजन खिलाने लगे। भोजन करने के बाद मयंक अपने दादाजी के साथ आँगन में घूमने के लिए चला गया। दादाजी ने कहा, "भोजन करने के बाद घूमना बहुत जरूरी है इसलिए हमें भोजन करने के बाद दस मिनट तक घूमना चाहिए। ऐसा करने से पेट में अपच और गैस कभी नहीं बनती।"
घूमने के बाद मयंक दादाजी के साथ सोना चाहता था। दादाजी ने सोने से पहले मयंक को एक कहानी सुनाई। कहानी सुनकर मयंक अपने दादाजी के साथ सो गया।
#संस्कार_सन्देश -
बच्चों को बचपन से ही बड़ों की आज्ञा का पालन करना और सेवा करना सिखाना चाहिए।
कहानीकार-
#विजयलक्ष्मी (प्र०अ०)
रा० प्रा० वि० चन्द्रनगर
रामनगर, जनपद- नैनीताल (उत्तराखण्ड)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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