जगदीश चंद्र बोस

30 नवंबर 1858 को विज्ञान का चमका सितारा,

भारत का वैज्ञानिक, नाम जगदीश चंद्र था प्यारा।

भौतिकी, जीव विज्ञान, पुरातत्व का गहरा था ज्ञान,

रेडियो सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर कार्य सारा।।


रेडियो विज्ञान के पिता का नाम पाया,

बंगाली विज्ञान कथाओं का जनक कहलाया।

केस्कोग्राफ का भी सफल किया आविष्कार,

पौधों की वृद्धि मापने का उपकरण बनाया।।


शोध संस्थान बोस इंस्टीट्यूट स्थापित किया,

1917 पहला अंतः विषय अनुसंधान केंद्र स्थापित किया।

स्वचालित रिकॉर्डर का भी निर्माण किया था,

इनके उपकरणों ने आश्चर्यजनक परिणाम बताया।।


1902 में पुस्तक "रिस्पांस इन द लिविंग एंड नॉन लिविंग" आई,

1926 में "पौधों का तंत्रिका तंत्र" पुस्तक प्रकाश में आई।

2004 के बीबीसी सर्वेक्षण में सातवें महान बंगाली चुने गए,

इलेक्ट्रिक और कंप्यूटर इंजीनियरिंग में प्रयोगों में मान्यता पाई।।


"कंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ इंडियन एंपायर" पाया,

1917 में "नाइट बैचलर" 1920 में "रॉयल सोसाइटी के फेलो" बताया।

भारत के राष्ट्रीय विज्ञान संस्थान के संस्थापक साथी बने,

23 नवंबर 1937 को विज्ञान का ये सूर्य अस्त हो गया।।


रचयिता
नम्रता श्रीवास्तव,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय बड़ेह स्योढ़ा,
विकास खण्ड-महुआ,
जनपद-बाँदा।

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