कोरोना का ही रोना

कोरोना का ही रोना है
आज पूरे विश्व में।
जन धन और जीवन की हानि
आज पूरे विश्व में।।
   मानव के सारे कृत्यों का
   परिणाम ये सामने आया है
   सहते-सहते प्रकृति ने अब
   ये रौद्र रूप दिखलाया है
   नहीं रहा अब कोई सुरक्षित
   आज पूरे विश्व में।।
ईश्वर ने सौंपी थी हमको
सुंदर प्यारी सी इक धरती
हमने अपनी प्रगति की खातिर
कर दी बर्बाद ये अपनी धरती
कण-कण दूषित है देखो
आज पूरे विश्व में।।
     कब तक आखिर प्रकृति सहेगी
     खुद पर अत्याचारों को
     आज सब्र का बाँध है टूटा
    मचा है देखो हा हा कार
     आज पूरे विश्व में।।
कुछ तो पावन रहने देते
इतनी भी क्या जल्दी है
अपने अपने स्वार्थ की खातिर
कुछ भी हमने न सोचा
लो बिछ रहा शमशान देखो
आज पूरे विश्व में।।
    अब भी सँभलो रुक जाओ
     प्रकृति को सुंदर रहने दो
     एटम बम न बना सको पर
     जानो को तो बक्शो तुम
     कितने अपने बिछड़ रहे हैं
     आज पूरे विश्व में।।
     नहीं सोचता आज ये मानव
     हम क्या देकर जाएँगे
     आने वाली संतानों को
     हम कैसे मुँह दिखलाएँगे
     किया खिलवाड़ प्रकृति से हमने
     यही वो हमसे सीखेंगे
     हो रहा इसीलिए देखो तांडव
     आज पूरे विश्व में।।

छोटे से इस जीवन में
ऐसा कुछ कर जाओ तुम
पीढ़ियों तक रहे जो याद
कुछ ऐसा नाम कमाओ तुम
स्वच्छ हो जीवन, स्वस्थ हो तनमन
स्वस्थ विचार और स्वस्थ आचरण
है समय की माँग यही
आज पूरे विश्व में।।
               
रचयिता
डॉक्टर नीतू शुक्ला,
प्रधान शिक्षक,
मॉडल प्राइमरी स्कूल बेथर 1,
विकास खण्ड-सिकन्दर कर्ण,
जनपद-उन्नाव।

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