जीतेगा देश, हारेगा कोरोना

कैसी विपदा की आई घड़ी है,
जिससे पूरी दुनिया रो पड़ी है।
देश हमारा भी इससे अछूता नहीं,
जाल ऐसा बुनी 'कोरोना मकड़ी' है।।

हाल बद से बदतर हो चले,
न कोई हाथ मिलाए, ना मिले गले।
एक ही हल सुझाया है देश ने,
देश रक्षा, स्व-सुरक्षा हेतु ज़रूरी फ़ासले।।

बिन महती ज़रूरत के घर छोड़ना नही,
लॉकडाउन अनुपालन से मुख मोड़ना नही।
हैं जहाँ पर, कुछ दिन रहना वहीं,
आज का वक्त कहता ये सबसे सही।।

संकट काल ऐसा, ट्रेनें सब हैं खड़ीं,
बन्द बाज़ार, बस, हवाई यात्रा ठप पड़ी।
शासन, प्रशासन, जनता की हो ऐसी तिकड़ी,
आपसी सहयोग की बने इक लम्बी कड़ी।।

आज धरती के हैं सर्वश्रेष्ठ भगवान,
स्वच्छताकर्मी, डॉक्टर, पुलिस और जवान।
सफ़ाई, स्वास्थ्य व सुरक्षा का दे रहे हैं दान,
हमारा कर्तव्य इनका भरपूर हो सहयोग, सम्मान।।

प्रधानमंत्री जी का कहना है बिल्कुल डरो ना,
अफ़वाहें रोकने व जागरूकता में मदद करो ना।
आप सब जनों के समर्थन, सहयोग से,
देश होगा विजयी और हारेगा कोरोना।

रचयिता
अभिनेन्द्र प्रताप सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय शाहपुर टिकरी,
विकास क्षेत्र-मंझनपुर,
जनपद-कौशाम्बी।

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