ओहो ये करोना

वैश्विक जगत में छाया एक ही नाम है
महामारी घोषित हुआ जीना हुआ हराम है
शोर मचा है चारों ओर करोना, करोना
छींकना हुए दूभर, कहना पड़ता है"डरो ना'
इससे बचने का उपाय, तुम ये करो ना
भीड़ भाड़ से तुम परहेज कर लो ना
आलिंगन छोड़ो, स्पर्श भी अब तुम करो ना
अभिवादन में तुम सिर्फ हाथ जोड़ो ना
इधर-उधर बेवजह तुम डोलो ना
लापरवाही से तुम इधर-उधर घूमो ना
सर्दी की ज्यादा परवाह अब तुम कर लो ना
तन को कपड़ों से खूब ढक लो ना
इधर-उधर का खाना खाना अब तो छोड़ो ना
घर में बैठो घर का पका ही खा लो ना
मुँह ढककर ही अब तुम बाहर निकलो ना
सामूहिक चर्चा में भाग तुम अब लो ना
मेले, मॉल, सिनेमा हॉल जाना अब छोड़ो ना
सर्दी खाँसी के लिए "काढ़ा' तुम पियो ना
अपनी सुरक्षा के लिए ही ये उपाय करोना।
 
रचयिता
सुनीता बहुगुणा,
सहायक अध्यापक,
राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय बिजनी बड़ी,
विकास क्षेत्र - यमकेश्वर,
जनपद - पौड़ी गढ़वाल,
उत्तराखण्ड।

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