अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस
ममता, करूणा, प्यार, स्नेह के कारण
सहती कष्ट अपार,
चलती हमसफ़र बनकर
लेकर होंठों पर मुस्कान।
मिटने न दो उसकी ममता
न बने दामिनी,
बहने दो उसकी करूणा
वो तो है जीवन दायिनी।
माँ, बहन, बेटी, पत्नी बन
निभाती साथ सदा,
जोखिमों से न डरे कभी
डटकर सामना करती सदा।
शक्ति बनकर
चलती साथ सदा,
इस आँचल को प्रवाह दो
जिसमें पलता रहे ये जहाँ।।
रचयिता
अर्चना गुप्ता,
प्रभारी अध्यापिका,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिजौरा,
विकास खण्ड-बंगरा,
जिला-झाँसी।

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