काव्यांजलि
🔵🔴 *#काव्यांजलि_2152* 🔴🔵
दिनांक- बुधवार, 13.03.2024~~~~~
कक्षा- 2
विषय- हिन्दी
पाठ- 4
*देखभाल*
होते हैं अपने शरीर में,
इतने प्यारे-प्यारे अंग।
सारी क्रियाओं में देते हैं,
जो हमारा इतना संग।।
प्यारे-प्यारे ये दो हाथ,
काम हमारा सब करते।
और अपने दो पैरों से,
कूदते, चलते, फिरते।।
जीभ हमारी स्वाद बताती,
खट्टा, मीठा या नमकीन।
और आँखों से देख बताते,
कितने होते एक-दो-तीन।।
छू कर के हम बतला देते,
चीज है ठण्डी या है गर्म।
नाक हमारी बतला देती,
सुगन्ध व दुर्गन्ध का मर्म।।
इतने कीमती इस शरीर की,
देखभाल है बहुत जरूरी।
जो चाहोगे कर पाओगे,
अभिलाषाएँ होंगी पूरी।।
🙏🏼 *रचना:-*
श्रीमती पूनम गुप्ता (स०अ०)
प्रा० वि० धनीपुर,
क्षेत्र- धनीपुर, जनपद अलीगढ़
✏️ *संकलन*
📝 *काव्यांजलि टीम,*
*मिशन शिक्षण संवाद*
*काव्याँजलि*#
टीम *मिशन शिक्षण संवाद* की ओर से कविताओं का नया संग्रह
🔵🟣 *काव्याॅंजलि 1070* 🟣🔵
दिनाँक- 13/03/2024, दिन- बुधवार
कक्षा- पञ्चम
विषय- संस्कृतम्
प्रथम: पाठ:, संस्कृत शब्दानि (भाग- १)
बालक: एक वचन पुल्लिंग,
बालकौ है द्विवचन।
बालका: बहुवचन जानो,
पढ़ो-लिखो, करो मनन।।
बालिका स्त्रीलिंग एकवचन,
द्विवचन में बालिके।
बालिका: बहुवचन की संज्ञा,
सीखो, तन्मय हो इसमें।।
पत्रम् नपुंसकलिंग एकवचन,
पत्रे द्विवचन का रूप।
बहुवचन में पत्राणि होता,
है संस्कृत बहुत अनूप।।
🙏रचना-:
दीवान सिंह कठायत (प्र०अ०)
रा० आ० प्रा० वि० उडियारी,
बेरीनाग, पिथौरागढ़।
📝 *काव्याँजलि टीम, मिशन शिक्षण संवाद- उत्तराखण्ड*
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