बेहिसाब सर्जिकल करो

अच्छा होता दुश्मन से तुम
लड़ते-लड़ते मिट जाते,
मातृभूमि हित शीश तुम्हारे
हँसते-हँसते कट जाते।
किन्तु बड़ा दुर्भाग्य कि तुमने
वार पीठ पर झेला है।
छल करने वालों ने फिर से
खेल रक्त का खेला है।
लातों के जो भूत हैं जो
कहाँ बातों से माना करते हैं।
मुखिया जनमत के फिर
आखिर क्यों बस निन्दा करते हैं।
बिलख रहा है देश
आज खुद कुदरत भी रोई होगी
कितनी ही माँओं ने आज फिर सन्तानें खोई होंगी।
कितनी आज सुहागन अपने दुःख को समझाती होंगी।
वीर सैनिकों की विधवा बन आँसू पी जाती होंगी
अरे देशहित मरने से सैनिक का जीवन सार्थक है,
किन्तु छलावों धोखों का उत्तर देना आवश्यक है।
नहीं चाहिए अब हिसाब
बस बेहिसाब सर्जिकल करो
ना हो अब कोई बात घात कर वार शत्रु को विकल करो।
पुष्पांजलि से, तोपों से न तृप्ति शहीदों को होगी,
देना मजबूत जवाब ही उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
   
रचयिता
डॉ0 श्वेता सिंह गौर
सहायक शिक्षिका 
कन्या जूनियर हाई स्कूल बावन,
हरदोई।

Comments

  1. वीर शहीदों की शहादत को कोटि कोटि नमन

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  2. हृदय स्पर्शी , मर्माहत करने वाली यथार्थ पंक्तियाँ ।

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